लेह (लद्दाख), 25 जनवरी । मुंबई के शॉर्ट-ट्रैक आइस स्केटर सोहन तारकर का मानना है कि सिर्फ तेज होना ही हमेशा पदक की गारंटी नहीं देता। उनके अनुसार जीत के लिए किस्मत का साथ भी जरूरी होता है।
लद्दाख के लेह में आयोजित खेलो इंडिया विंटर गेम्स (केआईडब्ल्यूजी) 2026 में 29 वर्षीय तारकर के लिए परिस्थितियां कुछ खास अनुकूल नहीं रहीं। 3000 मीटर रिले में उनकी टीम अयोग्य घोषित कर दी गई, जबकि 500 मीटर फाइनल में पीछे से धक्का लगने के कारण वे रेस पूरी नहीं कर सके और उन्हें ‘डिड नॉट फिनिश’ घोषित किया गया। हालांकि, 1000 मीटर और मिक्स्ड रिले में उनके पास अभी दो और मौके हैं।
मुंबई के इस स्केटर ने एक बयान में कहा, “मैंने इसे स्वीकार कर लिया है और अब यह मुझे परेशान नहीं करता। मैं रिंक पर वापस आकर खुश हूं और इसके लिए ईश्वर का आभारी हूं।”
सोहन का करियर एक समय लगातार ऊंचाइयों को छू रहा था, लेकिन लगभग छह साल पहले अवसाद ने उनकी राह रोक दी। सोहन ने 2010 में आइस स्केटिंग शुरू की और 2017 में जापान के सप्पोरो में हुए एशियन विंटर गेम्स में 1500 मीटर स्पर्धा के सेमीफाइनल तक पहुंचने में सफलता पाई। उन्होंने कई बार जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया। इसके अलावा दो बार सीनियर वर्ल्ड कप (जर्मनी और इटली) के लिए भी चयनित हुए, लेकिन दुर्भाग्यवश दोनों ही बार उन्हें वीजा नहीं मिल सका। यह सब कोविड-19 महामारी से ठीक पहले हुआ और महामारी ने हालात और बिगाड़ दिए।
शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण उनका वजन करीब 20 किलो बढ़ गया, जो इस खेल के लिए बेहद नुकसानदेह है। कभी चुस्त-दुरुस्त शरीर वाले सोहन पूरी तरह फिटनेस से बाहर हो गए और पहचान में भी नहीं आते थे। कठिन समय में उनकी मां सोनाली तारकर उनके लिए संजीवनी साबित हुईं। काफी समझाने-बुझाने के बाद मां की बातों का असर हुआ और 2023 के अंत में सोहन ने जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने का निर्णय लिया।
सोहन ने कहा, “मैं पूरी तरह टूट चुका था। कोविड से पहले मैं रोज छह घंटे अभ्यास करता था और मेरा वजन 58 किलो था, जो बढ़कर 78 किलो हो गया। मैं खुद को दुनिया से बिल्कुल अलग कर चुका था।”