खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 में फिगर स्केटिंग का ऐतिहासिक आगाज, केरल के अभिजित अमल राज ने जीता स्वर्ण

Share

लेह (लद्दाख), 24 जनवरी । खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 (केआईडब्ल्यूजी) में फिगर स्केटिंग के पहली बार शामिल होने के साथ ही भारत के शीतकालीन खेलों के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। इस ऐतिहासिक मौके के केंद्र में रहे केरल के अभिजित अमल राज, जिन्होंने पुरुषों की एडवांस कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल की, बल्कि देश में फिगर स्केटिंग को एक मजबूत राष्ट्रीय मंच भी दिलाया।

अभिजित अमल राज पहले से ही भारत के सबसे सफल आर्टिस्टिक स्केटर्स में शुमार हैं। वह 2019 वर्ल्ड रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता रह चुके हैं। साथ ही 2023 और 2025 एशियन रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप तथा 2023 वर्ल्ड स्केट ओशिनिया एंड पैसिफिक कप में भी गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। हालांकि, खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 में उनकी मौजूदगी खास रही क्योंकि यह लगभग एक दशक बाद आइस फिगर स्केटिंग में उनकी वापसी थी।

अभिजित की खेल यात्रा बेहद कम उम्र में शुरू हो गई थी। उन्होंने बोलने से पहले स्केट पहन ली थी और महज तीन साल की उम्र में औपचारिक प्रशिक्षण शुरू कर दिया था, लेकिन केरल जैसे तटीय राज्य में आइस स्केटिंग की सुविधाएं लगभग न के बराबर थीं। महंगे उपकरण, कोचिंग और बुनियादी ढांचे ने प्रतिभा को एक बड़ी आर्थिक चुनौती में बदल दिया। उनके पिता ने उनकी ट्रेनिंग के लिए अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा दी।

नौ साल की उम्र में उन्हें अर्जुन पुरस्कार विजेता अनुप कुमार यामा का मार्गदर्शन मिला। इसके बाद 11 बार के आर्टिस्टिक रोलर स्केटिंग वर्ल्ड चैंपियन और अंतरराष्ट्रीय कोच लुका डी’अलिसेरा से प्रशिक्षण लेने के लिए उन्हें इटली जाना पड़ा। वहां एक घंटे की कोचिंग फीस 100 यूरो थी और रोज चार घंटे की ट्रेनिंग पर एक महीने में लाखों रुपये खर्च हुए। इस सपने को पूरा करने के लिए परिवार को अपनी संपत्ति बेचकर किराए के घर में रहना पड़ा। सरकारी सहयोग बाद में मिला, लेकिन अभिजित की सफलता की नींव वर्षों के संघर्ष और त्याग से बनी।

रोलर स्केटिंग में वर्ल्ड चैंपियन बनने से पहले अभिजित आइस फिगर स्केटिंग में भी शानदार रिकॉर्ड बना चुके थे। उन्होंने 2014 में ताइवान एशियन ओपन फिगर स्केटिंग ट्रॉफी, दुबई गोल्डन कप और मलेशियन ओपन नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते थे। 2013 और 2014 में वह राष्ट्रीय चैंपियन भी रहे। 2016 में मलेशिया में एक और अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण जीतने के बाद उन्होंने रोलर स्केटिंग पर ध्यान केंद्रित किया। खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 में उनका स्वर्ण पदक लगभग दस साल बाद आइस स्केटिंग में शानदार वापसी का प्रतीक बना।

अभिजित की कहानी भारत में फिगर आइस स्केटिंग जैसे सीमित संसाधनों वाले खेलों की चुनौतियों को उजागर करती है। लंबे समय तक इस खेल में आगे बढ़ने के लिए विदेश जाना ही एकमात्र विकल्प था, जो अधिकतर परिवारों के लिए संभव नहीं था। आज 24 वर्ष की उम्र में अभिजित इस स्थिति को बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं।

अपनी फिगर स्केटिंग पार्टनर और 2025 एशियन रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप की गोल्ड मेडलिस्ट (आर्टिस्टिक पेयर) वकस्या लक्ष्मी नारायणन के साथ उन्होंने एडलर विजन नाम से अकादमी की स्थापना की है, जो केरल और तमिलनाडु में संचालित हो रही है। दो साल में इस अकादमी से 100 से अधिक छात्र जुड़ चुके हैं। यहां इटली के अंतरराष्ट्रीय कोच लुका डी’अलिसेरा और रैचेल कैम्पाग्नोल को बुलाया गया है, ताकि युवा खिलाड़ियों को देश में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिल सके।

अभिजित बताते हैं, “हम स्केटर्स की शुरुआत रोलर स्केटिंग से कराते हैं। उनकी रुचि और प्रदर्शन के आधार पर वे आइस स्केटिंग में जा सकते हैं या रोलर स्केटिंग में ही आगे बढ़ सकते हैं।”

उन्होंने बताया कि अकादमी के खिलाड़ी पहले ही कई राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं और खेलो इंडिया जैसे मंचों के जरिए भविष्य में उन्हें आइस स्केटिंग चैंपियनशिप में भेजने की योजना है।

वर्ष 2024 में अभिजित को महाराष्ट्र आयकर विभाग में खेल कोटे के तहत नियुक्ति भी मिली। उनके लिए खेलो इंडिया सिर्फ पदक जीतने का मंच नहीं है। वह इसे एक “प्रतिष्ठित चैंपियनशिप” मानते हैं और कहते हैं कि लद्दाख में उनकी मौजूदगी का मकसद अपने अकादमी के खिलाड़ियों को प्रेरित करना और यह दिखाना है कि देश में भी सार्थक राष्ट्रीय मंच उपलब्ध हैं।

फिगर स्केटिंग के पहली बार शामिल होने के साथ खेलो इंडिया विंटर गेम्स के छठे संस्करण में आठ राज्यों के 23 स्केटर्स ने हिस्सा लिया। इनमें सबसे ज्यादा हरियाणा (8), इसके बाद आंध्र प्रदेश (4) और उत्तराखंड (4) के खिलाड़ी शामिल रहे। यह भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश में शीतकालीन खेलों के लिए एक उत्साहजनक शुरुआत मानी जा रही है।