मप्र में रंगमंच, नृत्य और नाट्य के माध्यम से जीवंत हो रहा भारतीय महाकाव्य, आज ये रहेंगे आकर्षण का केंद्र

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भोपाल, 24 जनवरी । मप्र की राजधानी भोपाल में वीर भारत न्यास द्वारा भारत भवन में, सभ्यताओं के संघर्ष एवं औदार्य की महागाथा पर केंद्रित महाभारत समागम पिछले आठ दिनों से चल रहा है। भारतीय संस्कृति, दर्शन और परंपरा के शाश्वत ग्रंथ महाभारत को मंच पर जीवंत करने के उद्देश्य से आयोजित महाभारत समागम कला प्रेमियों के लिए एक विशेष सांस्कृतिक अनुभव लेकर आ रहा है। शनिवार को इसका नौवां दिन है।

आज के दिन कार्यक्रम की शुरुआत शाम पांच बजे पूर्वरंग के अंतर्गत नाटक “अभिमन्यु वध” से होगी। यह नाटक चक्रव्यूह में फंसे वीर अभिमन्यु के साहस, बलिदान और युद्ध की त्रासदी को प्रभावशाली मंचीय भाषा में प्रस्तुत करेगा। पूर्वरंग का उद्देश्य दर्शकों को भावनात्मक रूप से कथा से जोड़ते हुए मुख्य प्रस्तुतियों के लिए तैयार करना है।

इसके पश्चात शाम छह बजे अंतरंग सत्र में “चित्रांगदा” नृत्य-नाटिका की प्रस्तुति होगी। यह प्रस्तुति कुरुक्षेत्र नृत्य नाटिका समूह द्वारा दी जाएगी, जिसमें मणिपुर की राजकुमारी चित्रांगदा के व्यक्तित्व, प्रेम और आत्मसम्मान को शास्त्रीय नृत्य व नाट्य के संयोजन से प्रस्तुत किया जाएगा। नृत्य-नाटिका में पारंपरिक नृत्य शैलियों, भाव-भंगिमाओं और संगीत का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा। इसी सत्र में महाभारत आधारित एक अन्य नाट्य प्रस्तुति भी मंचित की जाएगी, जिसका निर्देशन प्रसिद्ध रंगकर्मी त्रिगुणी कौडिक ने किया है। यह प्रस्तुति महाभारत के दार्शनिक पक्ष, धर्म और अधर्म के द्वंद्व को समकालीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेगी।

कार्यक्रम का अंतिम चरण बहिरंग शाम 7:30 बजे आरंभ होगा, जिसमें “अश्वमेध दिग्विजय” नृत्य-नाट्य प्रस्तुति दर्शकों के सामने आएगी। इस प्रस्तुति का निर्देशन भारत भवन द्वारा किया गया है। अश्वमेध यज्ञ से जुड़ी यह कथा राजसत्ता, विस्तारवाद और शक्ति के प्रतीकात्मक अर्थों को नृत्य और दृश्य संरचना के माध्यम से उकेरेगी। मंच सज्जा, प्रकाश योजना और समूह नृत्य इस प्रस्तुति को विशेष रूप से प्रभावशाली बनाएंगे।

आयोजनों को लेकर वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि महाभारत समागम का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, यह नई पीढ़ी को भारतीय महाकाव्य की गहराई से परिचित कराने के लिए है। इस आयोजन में रंगमंच, शास्त्रीय व समकालीन नृत्य, संगीत और कथा-वाचन का समन्वय देखने को मिल रहा है। कला, साहित्य और संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए यह समागम एक ऐसा मंच है, जहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम अनुभव किया जा सकता है।