डीडवाना/ जोधपुर, 23 जनवरी ।केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल, सामाजिक असंतुलन और पर्यावरणीय संकटों के बीच भारत की सांस्कृतिक भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में भारत को अपने मूल्यों, मर्यादाओं और सेवा परंपरा के प्रति और अधिक सजग व संकल्पित होकर आगे बढऩा होगा, क्योंकि आज विश्व भारत की ओर आशा और दिशा की दृष्टि से देख रहा है। शुक्रवार को 162वें मर्यादा महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि आज पूरी दुनिया चिंता और तनाव के वातावरण से गुजर रही है। पारिवारिक ढांचे कमजोर हो रहे हैं और सामाजिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है। भौतिक संसाधनों की असीम आकांक्षा ने प्रकृति और पर्यावरण को गंभीर संकट में डाल दिया है, जिससे विश्व एक बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि जब पूरे विश्व की दृष्टि भारत की तरफ है तो हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।शेखावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सदैव विश्व को निष्काम भाव से सेवा करने का संदेश दिया है, जिसमें व्यक्ति के जीवन से समष्टि के कल्याण का भाव निहित है। शेखावत ने कहा कि सेवा का अर्थ केवल मानव सेवा तक सीमित नहीं है, अपितु इसमें संस्कृति, संस्कार, धर्म, मर्यादा तथा प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का भाव भी समाहित है। शेखावत ने भारतीय ऋषि-मनीषियों, साधु-संतों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सेवा और मर्यादा के मार्ग को अपनाकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति को निरंतर प्रवाहमान बनाए रखा, जिसको हमें आगे बढ़ाने के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने की जरूरत है।केंद्रीय मंत्री ने आचार्य भिक्षु द्वारा प्रारंभ की गई परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समय के साथ संघ का व्यापक विस्तार हुआ, जिससे साधकों और अनुयायियों की संख्या बढ़ी और इसका सकारात्मक प्रभाव जनमानस पर पड़ा। शेखावत ने कहा कि जहां एक ओर भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है, दूसरी ओर वैचारिक और सांस्कृतिक प्रदूषण की चुनौतियां भी सामने हैं। ऐसे में, मर्यादा महोत्सव जैसे पुनीत आयोजनों के माध्यम से समाज को संस्कारित और अधिक सक्रिय होकर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।