उमरिया , 23 जनवरी । मप्र के उमरिया जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर की संख्या को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गौर ट्रांसलोकेशन कार्यक्रम के द्वितीय चरण की शुक्रवार को सफल शुरुआत हो गई, जिसके अंतर्गत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए पांच गौरों को सुरक्षित रूप से बांधवगढ़ के जंगल में छोड़ा गया। इनमें एक नर और चार मादा गौर शामिल हैं। पिंजरा खुलते ही सभी गौर स्वाभाविक रूप से जंगल की ओर तेजी से भागे, जो उनके स्वस्थ और अनुकूल व्यवहार को दर्शाता है।
यह कार्यवाही प्रातः 9:30 से 10 बजे के मध्य बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कल्लवाह परिक्षेत्र में निर्मित विशेष गौर वाड़े में संपन्न हुई। इस संबंध में क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने जानकारी देते हुए बताया कि इन गौरों को एक दिन पूर्व, 22 जनवरी 2026 को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना क्षेत्र के निकट वन क्षेत्र से सफलतापूर्वक कैप्चर किया गया था। यह कैप्चरिंग प्रक्रिया सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक राखी नंदा के मार्गदर्शन एवं भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के वैज्ञानिक डॉ. पराग निगम के नेतृत्व में की गई।
गौरों की जनसंख्या में आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के उद्देश्य से यह पुनर्स्थापना कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यह परियोजना भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) एवं मध्य प्रदेश वन विभाग के संयुक्त सहयोग से “Population Management Strategies for Gaur: Supplementation of Gaur in Bandhavgarh Tiger Reserve, Madhya Pradesh” नामक प्रोजेक्ट के अंतर्गत लागू की जा रही है। इस परियोजना का प्रथम चरण फरवरी 2025 में संपन्न हुआ था, जिसमें 22 गौरों को सफलतापूर्वक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पुनर्स्थापित किया गया था।
द्वितीय चरण का यह ट्रांसलोकेशन ऑपरेशन 22 जनवरी से 25 जनवरी 2026 तक संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत कुल 27 गौरों को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ लाया जाना प्रस्तावित है। इस जटिल एवं संवेदनशील कार्य के लिए कुल 9 परिवहन दल गठित किए गए हैं। प्रत्येक दल में एक उप वनमंडल अधिकारी या वन क्षेत्रपाल, दो वन्यप्राणी चिकित्सक, वनपाल, वनरक्षक सहित कुल 10 सदस्य तथा 4 विशेष वाहन शामिल हैं, ताकि गौरों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जा सके।
उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ लैंडस्केप में 1990 के दशक में गौर पूरी तरह विलुप्त हो चुके थे। इसके बाद वर्ष 2010-11 में कान्हा टाइगर रिजर्व से 50 गौरों को ट्रांसलोकेट कर यहां पुनर्स्थापना का कार्य प्रारंभ किया गया। यह प्रयास अत्यंत सफल रहा और वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौरों की संख्या 191 से अधिक हो चुकी है।
गौर ट्रांसलोकेशन का यह संपूर्ण अभियान न केवल बांधवगढ़ में गौर जनसंख्या को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन तथा वन्यजीव प्रबंधन की दृष्टि से भी एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।