नई दिल्ली, 22 जनवरी । उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि मध्य प्रदेश स्थित भोजशाला में वसंत पंचमी की पूजा और नमाज दोनों होगी। उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि नमाज दोपहर एक से 3 बजे के बीच पढ़ी जा सकेगी। नमाज के लिए मंदिर परिसर में ही अलग से जगह निर्धारित होगी। नमाज पढ़ने वालों के लिए विशेष पास की व्यवस्था होगी। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वसंत पंचमी की पूजा के लिए भी जगह निर्धारित होगी। पूजा के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है।
इस विवाद में हिंदू पक्ष की याचिका में बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज से रोकने और सिर्फ हिंदुओं को ही मां सरस्वती की पूजा-अर्चना देने की इजाजत की मांग की गई थी।
दरअसल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के 7 अप्रैल, 2023 को जारी आदेश के मुताबिक भोजशाला में हिन्दुओं को मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा की इजाजत है, वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को एक से तीन बजे के बीच नमाज पढ़ सकते हैं, लेकिन एएसआई के इस आदेश में यह साफ नहीं है कि अगर बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन होगी, तो क्या होगा।
वकील विष्णु शंकर जैन के जरिये दाखिल इस याचिका में कहा गया था कि मां सरस्वती का यह मंदिर परमार राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में बनाया था। कोर्ट के आदेश के मुताबिक हुए सर्वे में भी यहां मंदिर होने की पुष्टि हुई है। ऐसे में एएसआई का आदेश वैसे ही अपने आप में गलत है लेकिन बसंत पंचमी का दिन तो मां सरस्वती की पूजा अर्चना का दिन है। उस दिन हवन, पूजा और महाआरती जैसे जरुरी धार्मिक कर्म संकल्प से पूर्णाहूति तक बिना किसी व्यवधान के होने चाहिए। गर्भगृह की पवित्रता कायम रहनी चाहिए। ऐसे में उस दिन नमाज की इजाजत नहीं होनी चाहिए।