नई दिल्ली, 22 जनवरी । भारत ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर ‘स्किल्स एक्सेलेरेटर’ शुरू करने का ऐलान किया है, जिसके जरिए तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षण तंत्र को उद्योग और वैश्विक अर्थव्यवस्था की मांगों के अनुरूप मजबूत बनाया जाएगा।
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने बताया कि इस एमओयू के तहत भारत में बहु-हितधारक मंच स्थापित होगा, जो नवाचार, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और कौशल अंतराल को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने कहा कि यह पहल भारत के कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य के कामकाज के अनुरूप बनाने की दिशा में ठोस और वैश्विक रूप ले चुकी है। उन्होंने इसे “भविष्य के लिए तैयार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल” तैयार करने की दिशा में अहम पड़ाव बताया।
शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि यह एमओयू राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के विजन को मजबूती देता है, जिसमें शिक्षा और स्किलिंग का एकीकरण, आजीवन सीखने और उद्योग की भावी जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम पर जोर है। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं की वैश्विक रोजगार क्षमता बढ़ाएगी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी, रोबोटिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत की प्रतिभा को तैयार करेगी।
भारत स्किल्स एक्सेलेरेटर के सह-अध्यक्ष संजीव बजाज ने कहा कि युवाओं को कौशल देना भारत की जनसांख्यिकीय बढ़त को आर्थिक नेतृत्व में बदलने के लिए जरूरी है। वहीं सह-अध्यक्ष शोभना कामिनेनी ने कहा कि यह पहल नीति और व्यवहार के बीच की कड़ी को मजबूत करेगी और भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में भविष्य-तैयार प्रतिभा प्रदाता के रूप में स्थापित करेगी।
उल्लेखनीय है कि नया रायपुर अटल नगर में देश का पहला आदिवासी डिजिटल संग्रहालय पहले ही स्थापित किया जा चुका है। अब स्किल्स एक्सेलेरेटर के माध्यम से एमएसडीई उच्च शिक्षा संस्थानों, व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों और नियामक निकायों (एआईसीटीई, यूजीसी) के साथ मिलकर कौशल विकास को नई दिशा देगा। इसमें आजीवन सीखने, अपस्किलिंग-रीस्किलिंग, लचीले पाठ्यक्रम, योग्यता की पारस्परिक मान्यता और संस्थागत क्षमता निर्माण पर जोर रहेगा।