नई दिल्ली, 15 जनवरी । दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वो ये सुनिश्चित करें कि दिल्ली के सभी निजी स्कूलों में पैरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन काम करे। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।
जस्टिस फॉर ऑल नामक संस्था ने दायर याचिका में कहा है कि निजी स्कूलों में पैरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन नहीं होने की वजह से स्कूलों की ओर से फीस संबंधी फैसलों पर कोई सवाल नहीं पूछा जाता है। याचिका में कहा गया है कि शैक्षणिक कानूनों के तहत पैरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन का गठन करने के प्रावधान का मान्यता प्राप्त स्कूल पालन नहीं करते हैं। याचिका में कहा गया है कि पैरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन के उचित तरीके से गठन हुए बिना अभिभावक किसी भी महत्वपूर्ण फैसले को स्कूल प्रबंधन के समक्ष नहीं रख पाते हैं।
इसके पहले जस्टिस फॉर ऑल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने सात जनवरी को दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को निर्देश दिया था कि वो दिल्ली के सरकारी स्कूलों का सर्वेक्षण कर बताएं कि स्कूलों में कानून के मुताबिक क्या-क्या कमियां हैं। कोर्ट ने कहा था कि पूरे सर्वेक्षण की मानिटरिंग दिल्ली सरकार के शिक्षा सचिव, दिल्ली नगर निगम के आयुक्त और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के चेयरमैन करेंगे। कोर्ट ने कहा कि सर्वेक्षण रिपोर्ट में ये जरुर होना चाहिए कि क्या स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्टर शिक्षा के अधिकार कानून के मुताबिक हैं कि नहीं।