अग्रिम जमानत अर्जी में कहा गया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एक गैंग काम कर रही है। उसके खिलाफ पहले गाजियाबाद में मामला दर्ज कराया गया, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस पर कार्रवाई करने पर रोक लगा दी। इसके सात दिन बाद ही सांगानेर सदर थाने में उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया गया और इसे गंभीर रूप देने के लिए लडकी ने घटना दो साल पहले जब वह नाबालिग थी, तब की बता दी। अग्रिम जमानत अर्जी में कहा गया कि वह पेशेवर क्रिकेटर है और समाज में उसकी प्रतिष्ठा है। इसके अलावा वह प्रकरण की जांच में सहयोग करने को तैयार है। ऐसे में उसे अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाए। जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील रचना मान ने कहा कि आरोपी ने पीडिता को क्रिकेट में करियर बनाने का झांसा देकर कई बार संबंध बनाए हैं। वहीं नाबालिग की सहमति भी कानून में कोई महत्व नहीं रखती है। इसलिए आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपी क्रिकेटर की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।