मंत्री लोधी ने बताया कि श्रीराम राजा सरकार मंदिर परिसर, ओरछा में ‘‘श्री रामराज्य’’ कला दीर्घा की स्थापना की गई है। इस दीर्घा में श्रीराम के चरित्र को प्रतिष्ठित 36 गुणों के माध्यम से देश की विभिन्न लोकचित्र शैलियों में चित्रांकित किया गया है। ‘‘श्रीराम राज्याभिषेक’’ की झाँकी उड़ीसा की पारंपरिक मूर्ति और चित्र शैली में प्रदर्शित की गई है, जो दर्शकों को श्रीराम के आदर्श जीवन दर्शन और मर्यादा पुरुषोत्तम के चरित्र की झलक प्रदान करती है।
सांस्कृतिक संवर्धन में एक और महत्वपूर्ण पहल ‘आदिवर्त’ संग्रहालय-खजुराहो की है। 20 फरवरी, 2024 को इस संग्रहालय के गुरुकुल की स्थापना के लिए भूमिपूजन किया गया। यह देश का पहला पारंपरिक कला गुरुकुल है, जिसमें विभिन्न कला शैलियों का संरक्षण और प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसी क्रम में, स्वर्गीय जनगढ़ सिंह श्याम की सांस्कृतिक दृष्टि और गोण्ड समुदाय की कलाओं के लोकव्यापीकरण के लिए ग्राम-पाटनगढ़, जिला डिंडोरी में ‘स्व. जनगढ़ सिंह श्याम गोण्ड कला केन्द्र’ स्थापित किया गया है।
उन्होंने बताया कि धार्मिक नगरी चित्रकूट में कामदगिरी परिक्रमा मार्ग का विकास लगभग 36 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। अमरकंटक में श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव हेतु लगभग 50 करोड़ के विभिन्न कार्य सम्पन्न किए गए हैं। उज्जैन में ‘वीर भारत संग्रहालय’ का निर्माण युगयुगीन भारत के महानायकों की वीरता और तेजस्विता को प्रदर्शित करेगा। इसके साथ ही राज्य में धार्मिक स्थलों के विकास की व्यापक श्रृंखला आरंभ की गई है। महाकाल महालोक-उज्जैन, सान्दीपनि आश्रम लोक-उज्जैन, देवीलोक-सलकनपुर एवं दतिया, श्रीहनुमान लोक-पांढुर्ना, श्रीरामराजा लोक-ओरछा, श्रीराम वनवासी लोक-चित्रकूट समेत कुल 20 लोकों का निर्माण किया जा रहा है। त्रिवेणी संग्रहालय, उज्जैन द्वारा ‘नाद प्रदर्शनी’ का निर्माण किया गया, जिसमें 600 से अधिक वाद्ययंत्र प्रदर्शित किए गए हैं।
श्रीरामचंद्र वनगमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय
पत्रकारों से संवाद में मंत्री लोधी का कहना था कि प्रदेश सरकार द्वारा भगवान श्रीराम को समर्पित ‘राम वन गमन पथ’ की संकल्पना को मूर्त रूप दिया गया है। वनवास के दौरान श्रीराम से जुड़े स्थलों का पर्यटन एवं सांस्कृतिक दृष्टि से विकास किया जा रहा है। इसी प्रकार, ‘श्रीकृष्ण पाथेय’ योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन योजनाओं के माध्यम से साहित्यिक और सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में धार्मिक स्थलों और मंदिरों का सर्वेक्षण कर चित्रात्मक पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा का लोकव्यापीकरण ‘विक्रमोत्सव’, व्याख्यानमाला, शोध पत्रिका, यूट्यूब चैनल ‘भारत विक्रम’ एवं प्रदर्शनी के माध्यम से किया जा रहा है। उर्दू अकादमी द्वारा साहित्यकारों का ऑनलाइन पंजीयन और दुर्लभ पुस्तकों का अनुवाद कार्य संपन्न हुआ। नर्मदा साहित्य मंथन और भोज महोत्सव में युवाओं को महाराजा भोज के ग्रंथों से परिचित कराया गया। इसके अलावा मध्यप्रदेश में शैव, शाक्त एवं वैष्णव परंपरा से जुड़े नृत्य-नाट्य प्रस्तुतियों और लोककलाओं के माध्यम से ऐतिहासिक नायकों जैसे रानी दुर्गावती, रानी अवंतीबाई, लोकमाता देवी अहिल्या बाई आदि का लोकव्यापीकरण किया गया। जनजातीय संस्कृति के संवर्धन हेतु वनवासी चरित्र आधारित नाट्य-प्रस्तुतियों और घुमंतू समुदायों की विलुप्त होती भाषाओं के शब्द संचय का कार्य किया गया है ।
संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र
इसके साथ ही मंत्री लोधी का कहना रहा, उज्जैन में ‘वीर भारत न्यास संग्रहालय’, भोपाल में ‘सिटी म्यूजियम’, ग्वालियर में ‘म्यूजियम ऑफ म्यूजिक’ एवं ‘अटल म्यूजियम’, सागर में ‘संत रविदास संग्रहालय’, पन्ना में ‘डायमंड म्यूजियम’, महेश्वर में ‘देवी अहिल्या संग्रहालय’, जबलपुर में ‘रानी दुर्गावती संग्रहालय’ का निर्माण कार्य जारी है। ओरछा, सलकनपुर, अमरकंटक, चित्रकूट, जामसावली और दतिया में धार्मिक और सांस्कृतिक लोकों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
विश्व कीर्तिमान और सांस्कृतिक उपलब्धियाँ
उन्होंने बताया कि ग्वालियर में 100वें तानसेन समारोह में 546 वादकों द्वारा एक साथ प्रस्तुति देकर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया गया। गीता जयंती पर 3721 आचार्यों और बच्चों द्वारा गीता पाठ, खजुराहो नृत्य समारोह में 1484 कथक नर्तक-नृत्यांगनाओं की प्रस्तुति और उज्जैन में महाकाल की सवारी में 550 डमरू वादन के विश्व रिकॉर्ड स्थापित किए गए। ओमकारेश्वर में आचार्य शंकर की 108 फीट ऊंची ‘स्टेच्यू ऑफ वननेस’ की स्थापना के बाद 2424 करोड़ की लागत से ‘एकात्म धाम’ परियोजना की स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें आचार्य शंकर के जीवन योगदान और अद्वैत वेदांत दर्शन का वैश्विक प्रचार किया जाएगा।
इसके अलावा मंत्री लोधी का कहना यह भी रहा कि अठारह पुराणों और देवी-देवताओं के विभिन्न स्वरूपों का चित्रांकन किया गया है । 108 ‘नटराज’ प्रतिमाओं का निर्माण और पारंपरिक वाद्यों का संग्रह पहली बार किया गया। उज्जैन में संदीपनि आश्रम में ‘सर्वांग’ कला दीर्घा स्थापित की गई, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सीखी गई 14 विद्याओं एवं 64 कलाओं का राजस्थान की नाथद्वारा शैली में चित्रांकन कराया गया।