उन्होंने स्वतंत्र, आश्रित, बाह्य और भ्रमित करने वाले चर सहित विभिन्न प्रकार के चरों पर भी चर्चा की। डॉ. त्रिपाठी ने शोध में कारक विश्लेषण और कारक डिजाइन के विकास और अनुप्रयोग की व्याख्या की।
कार्यशाला के इस सत्र में टी-टेस्ट, वन-वे एनोवा, टू-वे एनोवा जैसे प्रमुख सांख्यिकीय परीक्षणों और संबंधित विश्लेषणात्मक तकनीकों को भी शामिल किया गया। यूनिवेरिएट, बाइवेरिएट और मल्टीवेरिएट विश्लेषण के लिए एसपीएसएस में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न शब्दों और उपकरणों को व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समझाया गया और डेटा रीकोडिंग, मिस्ड वैल्यू को हैंडल करना और विश्वसनीयता परीक्षण करना जैसी महत्वपूर्ण विशेषताओं पर चर्चा की। दो दिवसीय कार्यशाला में डेटा के प्रकार, सहसंबंध, मल्टी कोलिनियरिटी और डेटा विश्लेषण के सूक्ष्म पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
इसके पूर्व अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर उमेश प्रताप सिंह ने सभी का स्वागत और अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में प्रोफेसर विवेक भदौरिया, प्रोफेसर अशोक पाठक, डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा और डॉ. प्रेम प्रकाश सिंह उपस्थित थे। कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों के शोधार्थियों ने भाग लिया।