विकसित भारत की दिशा तय करते हैं: राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल
सोनीपत, 29 नवंबर । सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय में आयोजित दो
दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के संबोधन के साथ शनिवार को हुआ। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों का व्यापक परिप्रेक्ष्य
विषय पर आयोजित इस महत्वपूर्ण सेमिनार में मुख्य न्यायाधीश ने कानून के छात्रों से
आह्वान किया कि वे ईमानदारी को अपने चरित्र का मूल स्तंभ बनाएं और इसे किसी भी कीमत
पर न बदलें।
शनिवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कानून का अध्ययन
कठिन होने के साथ-साथ अत्यंत प्रेरक भी है, क्योंकि यह भविष्य की दिशा तय करता है।
उन्होंने कहा कि संविधान तभी सुरक्षित रह सकता है, जब
उसकी रक्षा के लिए आपकी नैतिकता दृढ़ रहे। ईमानदारी केवल चरित्र का आभूषण नहीं, बल्कि
वह अनुशासन है जो न्याय और सम्मान दोनों को बनाए रखता है। उन्होंने वर्तमान समय की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए
कहा कि यह सत्य और शोर का युग है, जहां डीपफेक विकृतियां फैलाते हैं, गलत सूचनाएं तेजी
से पहुंचती हैं और डिजिटल गिरफ्तारियां जैसी प्रवृत्तियां सामने आ रही हैं।
ऐसे समय
में ईमानदारी केवल आदर्श नहीं, बल्कि अस्तित्व का साधन है और वास्तविक सफलता का एकमात्र
वैध रास्ता भी है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी याचिका पर विचार करते समय न्यायालय
केवल तथ्यों और कानून को नहीं देखता, बल्कि संविधान के उस मूल वादे को भी स्मरण रखता
है, जिसे राष्ट्र ने 26 नवंबर 1949 को स्वयं को समर्पित किया था। न्याय करते समय उद्देश्य
केवल कानून का पालन करना नहीं, बल्कि उसे एक बेहतर भारत के निर्माण की सेवा में समर्पित
करना है।
सम्मेलन में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र
प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने राष्ट्रीय ध्वज की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए
कहा कि जब ध्वज को अंतिम रूप देने पर विचार चल रहा था, तब तिरंगे के मध्य चरखा रखने
का प्रस्ताव था। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इसका विरोध करते हुए स्पष्ट कहा कि चरखा रखने
से ध्वज किसी दल का प्रतीक बन जाएगा, न कि पूरे राष्ट्र का। उन्होंने अशोक चक्र का
उदाहरण दिया, जिसकी 24 तीलियां निरंतर कार्य, करुणा, समता, स्वतंत्रता और न्याय जैसे
मानवीय गुणों की प्रतीक हैं। समिति ने डॉ. अंबेडकर के तर्क को स्वीकार करते हुए चरखे
के स्थान पर अशोक चक्र को ध्वज में शामिल किया।
कार्यक्रम के दौरान इमानदार-इंटरनेशनल मूटिंग एकेडमी फॉर एडवोकेसी,
नेगोशिएशन, विवाद न्यायनिर्णय, मध्यस्थता और समाधान का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया।
इसका उद्देश्य विधि छात्रों को वकालत, विवाद निपटान और मध्यस्थता के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय
स्तर का प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस सम्मेलन में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, सॉलिसिटर
जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश
ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार, तथा विश्वविद्यालय
के कुलाधिपति एवं सांसद नवीन जिंदल शामिल हुए ।