सुशील सारवान ने कहा कि बच्चों का सुरक्षित बचपन, उनकी शिक्षा और उनके अधिकारों की
रक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत
किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप समाज में यह समझ बढ़ी है कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक
बुराई है और लोग प्रशासन के साथ खड़े हो रहे हैं।
उपायुक्त
ने बताया कि पिछले वर्ष जिला प्रशासन को बाल विवाह से जुड़ी 25 शिकायतें मिलीं। इनमें
से 13 मामलों में समय पर हस्तक्षेप कर बच्चों को कम उम्र के विवाह से रोका गया। 11
मामलों में पुलिस ने कानूनी कार्रवाई की, जबकि 1 शिकायत असत्य पाई गई। उन्होंने कहा
कि लक्ष्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि यह संदेश देना है कि शिक्षा, सुरक्षा और समान
अवसर बच्चों का अधिकार हैं और समाज का सहयोग इस दिशा में आवश्यक है।
जिला
प्रोटेक्शन और बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने कहा कि शिकायतें बढ़ना जागरूकता
बढ़ने का संकेत है। आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों और
नागरिकों से मजबूत सहयोग मिला है।