ओडिशा कृषि विभाग का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, आर्गेनिक खेती के सीखेंगे गुर

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उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा जैविक एवं प्राकृतिक खेती में किए जा रहे अनुसंधान कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये खेती प्रणालियाँ गौ-आधारित एवं स्थानीय संसाधनों पर आधारित होती हैं तथा पूरी तरह से रसायन मुक्त हैं। डॉ. पांडा ने अधिकारियों को वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय के माध्यम से सुरक्षित खाद्य उत्पादन, गुणवत्ता सुधार तथा पर्यावरण-सम्मत कृषि को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

गौरतलब है कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ओडिशा के पांच जिलों से आए 20 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहा है, जिसमें संयुक्त निदेशक कृषि, राज्य जैव-रसायन शास्त्री, कृषि जिला अधिकारी, दो सहायक कृषि निदेशक, नौ सहायक कृषि अधिकारी तथा छह ब्लॉक कृषि अधिकारी शामिल हैं।

कार्यक्रम निदेशक डॉ. जनार्दन सिंह ने कुलपति एवं प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया तथा वर्तमान कृषि परिदृश्य में जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उद्देश्यों, महत्व एवं संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने गुणवत्ता युक्त फसल उत्पादन एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों पर भी चर्चा की।