ने राजनीतिक दलों को 2000 रुपये से कम का गुमनाम नकद चंदा लेने के इनकम टैक्स कानून के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, निर्वाचन आयाेग और राजनीतिक दलों को नोटिस जारी किया है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी किया।
याचिका खेम सिंह भाटी ने दायर की है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विजय हंसारिया से कोर्ट ने पूछा कि उन्होंने पहले उच्च न्यायालय
का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर पहले उच्च न्यायालय
को विचार करने दें। हंसारिया ने कहा कि यह याचिका सभी राजनीतिक दलों और देश भर में उन्हें मिलने वाली फंडिंग से जुड़ी है।
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया जाए कि वो किसी भी राजनीतिक दल के रजिस्ट्रेशन और चुनाव चिन्ह के आवंटन के लिए एक शर्त यह तय करें कि कोई भी राजनीतिक दल कैश में कोई रकम नहीं ले सकती है। याचिका में कहा गया है कि पारदर्शिता की कमी चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता को कमजोर करती है। इससे मतदाताओं को राजनीतिक दलों को मिलने वाले पैसे के स्रोत के बारे में जानकारी नहीं मिलती है। मतदाताओं को दानदाताओं और उनके मकसद का पता नहीं चल पाता है जिससे वे वोट देते समय सही और समझदारी भरा फैसला नहीं ले पाते हैं।
याचिका में इनकम टैक्स एक्ट की धारा 13ए के उपधारा डी को गैर-कानूनी बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में उच्चतम न्यायालय
के 2024 के फैसले का जिक्र किया गया है, जिसमें इलेक्टोरल बांड की स्कीम को खत्म कर दिया गया था।