कई चर्चित निर्दलीय और क्षेत्रीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। नवादा के शिक्षित शिक्षाविद् तथा जैन स्वराज पार्टी के प्रत्याशी डॉक्टर अनुज सिंह, जिन्होंने घर-घर प्रचार और व्यापक जनसंपर्क किया, जनता को प्रभावित करने में सफल नहीं हो पाए। नवादा विधानसभा सीट से जदयू की उम्मीदवार विभा देवी ने राजद प्रत्याशी कौशल यादव को 38,000 वोटों के विशाल अंतर से हराकर रिकॉर्ड कायम किया। यह जीत न सिर्फ चुनावी आंकड़ों के लिहाज़ से ऐतिहासिक है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि नवादा की जनता ने विकास आधारित राजनीति पर भरोसा जताया है।
माना जा रहा है कि महिला मतदाताओं, युवाओं और सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों ने निर्णायक मतदान किया, जिसने परिणाम का रुख मजबूत किया। विभा देवी ने जीत के बाद कहा— “यह जनता की जीत है, अब हमारा लक्ष्य नवादा के विकास को नई गति देना है। हिसुआ विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी अनिल सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार नीतू कुमारी को 27,000 से अधिक मतों से पराजित कर स्पष्ट किया कि यहाँ भाजपा का जनाधार मजबूत हुआ है। अनिल सिंह ने कहा— “यह जनादेश विकास के प्रति जनता के विश्वास का प्रतीक है।
गोविंदपुर सीट से एलजेपी (रामविलास) की प्रत्याशी विनीता मेहता ने राजद उम्मीदवार पूर्णिमा यादव को 22,991 वोटों के अंतर से हराया। यह जीत चिराग पासवान की एलजेपी-आर के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विनीता मेहता ने कहा कि प्राथमिकता किसानों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाना रहेगा।
वारिसलीगंज विधानसभा सीट पर राजद प्रत्याशी अनीता देवी ने भाजपा उम्मीदवार अरुणा देवी को लगभग 16,000 वोटों से पराजित किया। यह सीट पूरे जिले में महागठबंधन की एकमात्र जीत साबित हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत संगठित वोटबैंक और स्थानीय समस्याओं की पहचान पर आधारित रही। रजौली विधानसभा से एलजेपी-आर उम्मीदवार विमल राजवंशी ने राजद की पिंकी भारती को 3,262 वोटों से हराया। अंतर हालांकि कम रहा, लेकिन यह जीत रजौली में एनडीए की पकड़ का संकेत देती है। कहा जा रहा है कि एससी-एसटी समुदाय का समर्थन इस जीत में निर्णायक साबित हुआ।