हिसार, 14 नवंबर । जिले के धीरणवास गांव निवासी आईटीबीपी जवान प्रदीप
कालीरावण बठिंडा में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। गुरुवार शाम अचानक हार्ट फेल होने
के बाद उन्हें मृत घोषित किया गया। अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद एनडीआरएफ की टीम
शुक्रवार शाम को उनके पार्थिव शरीर को गांव लेकर गांव पहुंची जहां देर सायं गमगीन माहौल
में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। प्रदीप के निधन की सूचना मिलने पर गांव में मातम
पसरा हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि प्रदीप कालीरावण वर्ष 2012 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस
(आईटीबीपी) की एनडीआरएफ की सातवीं बटालियन में शामिल हुए थे। करीब 13 वर्षों की सेवा
के दौरान उन्होंने कई राहत और बचाव अभियानों में हिस्सा लिया। गुरुवार शाम ड्यूटी के
दौरान अचानक सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों
ने हार्ट फेल होने से मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही धीरणवास गांव में
शोक की लहर दौड़ गई। परिजन और ग्रामीण तुरंत बठिंडा पहुंच गए। शहीद प्रदीप के माता-पिता
का पहले ही निधन हो चुका है। उनके परिवार में आठ वर्षीय बेटा कुनाल और तीन विवाहित
बहनें हैं।
गांव के लोगों ने बताया कि प्रदीप अपने मिलनसार स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठा के
लिए जाने जाते थे। उनके निधन से पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है। प्रदीप कालीरावण का
जन्म अगस्त 1991 में हुआ था। प्रदीप के पिता उदयबीर का 8 साल पहले और मां का 17 साल
पहले निधन हो चुका है। प्रदीप की शादी बरवाला के गांव खेदड़ में हुई थी। प्रदीप के पिता
के चार और भाई हैं। दो भाई फौज में थे। इसके अलावा प्रदीप के दादा गजानंद भी फौज में
थे। इसके कारण प्रदीप को बचपन से ही फौज में जाने की प्रेरणा मिली थी। बताया जा रहा
है कि प्रदीप करीब एक महीना पहले ही अपने परिवार से मिलने घर आया था, इसके बाद वह वापस
ड्यूटी पर लौट गए थे।