समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर जीवन शैली और खान-पान में सुधार आवश्यक : डॉ विकास मिश्रा

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उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक स्वास्थ्य का अर्थ है अपने को शांत और प्रसन्नचित्त रखना। अपनी दिनचर्या और खान-पान की आदतों में सुधार करके, आवश्यकता पड़ने पर सभी प्रकार के चिकित्सा पद्धतियों का सहारा लेकर हम समग्र स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं। क्योंकि सभी चिकित्सा पद्धतियां एक दूसरे की पूरक हो सकती हैं। प्रो पूनम मित्तल, अरुण त्रिपाठी, आलोक शाह, प्रो उमेश प्रताप सिंह, प्रो विवेक भदौरिया सहित अनेक श्रोताओं ने डॉ विकास मिश्रा से इस संदर्भ में प्रश्न भी पूछे।

इस अवसर पर विशिष्ट वक्ता एक्युप्रेशर शोध संस्थान के डॉ सरल मिश्र ने विभिन्न प्रकार के रोगों और शारीरिक परेशानियों में तात्कालिक लाभ के लिए एक्यूप्रेशर की विभिन्न तरीकों को बताया और उसे करके दिखाया। इस दौरान अतिथियों को अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

प्रयाग शाखा के अध्यक्ष राज नारायण अग्रवाल ने वक्ताओं सहित सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर सुनील कांत मिश्रा तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर विवेक भदोरिया ने किया। इस अवसर पर प्रो अशोक मित्तल, शरद गुप्ता, डॉ पुरुषोत्तम दास केसरवानी, डॉ जगदीश्वर द्विवेदी, डॉ रितेश अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, अरुण त्रिपाठी, डॉ रमन भदौरिया सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।