आदिवासी कला, परंपराओं और जीवन दर्शन पर आधारित इस रिजॉर्ट की विशिष्ट थीम ने विदेशी मेहमानों को बेहद प्रभावित किया। अतिथियों का पारंपरिक शैली में गुड़हल के फूलों की चाय से स्वागत किया गया। बस्तर के घने जंगलों, हरियाली और जनजातीय संस्कृति को देखकर उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय रहेगा।
पर्यटकों ने कहा कि, उन्हें विश्वास नहीं था कि आज की दुनिया में भी प्रकृति, जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण का इतना जीवंत संगम कहीं और देखने को नहीं मिल सकता है। उन्होंने पूरे बस्तर क्षेत्र को गहराई से एक्सप्लोर करने की इच्छा जताई और बताया कि वे बार-बार यहां लौटना चाहेंगे।
अतिथियों ने स्थानीय प्रशासन, पर्यटन विभाग और राज्य सरकार की सराहना करते हुए उनकी मेहमाननवाजी और व्यवस्था के लिए धन्यवाद प्रकट किया। उन्होंने कहा कि बस्तर न केवल अपनी सुंदरता बल्कि अपनी आत्मा से भी पर्यटकों को जोड़ने की क्षमता रखता है।