क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि 31 मई, 2010 को थाना महेन्द्रा पार्क में एक कॉल मिली थी कि जहांगीरपुरी के एक घर से दुर्गंध आ रही है। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर देखा तो एक महिला का सड़ा-गला शव फर्श पर पड़ा था। महिला की उम्र करीब 25 वर्ष थी। पास ही एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसे देखकर पुलिस ने शुरुआती जांच में आत्महत्या का मामला माना। हालांकि जांच के दौरान संदेह गहराने पर महिला के पति नरोत्तम प्रसाद पर शक हुआ। लेकिन वह घटना के बाद फरार हो गया। उसे कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर दिया और उसकी गिरफ्तारी पर दस हजार रुपये का इनाम रखा गया।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि चार नवंबर को सूचना मिली कि वांछित आरोपित गुजरात में छिपा हुआ है। सूचना को पुख्ता कर टीम को वडोदरा भेजा गया। पांच नवंबर को पुलिस ने तकनीकी और मैनुअल जानकारी के आधार पर छोटा उदयपुर (वडोदरा, गुजरात) से आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में नरोत्तम ने स्वीकार किया कि शादी के कुछ समय बाद ही दोनों में विवाद बढ़ गया था। गुस्से में उसने पत्नी का गला दबाकर हत्या कर दी और फिर पुलिस को भ्रमित करने के लिए फर्जी सुसाइड नोट लिख दिया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित मूल रूप से सीकर, राजस्थान का रहने वाला है और पिछले कई वर्षों से गुजरात के छोटा उदयपुर में एक कॉटन फैक्ट्री में मैनेजर के पद पर काम कर रहा था। उसने एमबीए की पढ़ाई की हुई है और पहचान छिपाकर नया जीवन बिता रहा था।