कोर्ट ने एचसी गुप्ता के अलावा पूर्व लोक सेवक केएस क्रोफा, आरकेएम पावरगेजन प्राइवेट लिमिटेड , आरकेएम पावरगेजन प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर अंडाल अरुमुगम और आरकेएम पावरगेजन प्राईवेट लिमिटेड के डायरेक्टर टीएम सिंगारवेल को बरी करने का आदेश दिया है।
मामला 2006 का है, जब आरकेएम पावरगेन प्राइवेट लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ के फतेहपुर ईस्ट में कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए 2006 में कोयला मंत्रालय के यहां आवेदन दिया। आरकेएम पावरगेन पर आरोप है कि उसने कोयला ब्लॉक का आवंटन हासिल करने के लिए अपनी कुल परिसंपत्तियों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया और भूमि अधिग्रहण से संबंधित फर्जी दस्तावेज पेश किए। आरोप है कि कोयला मंत्रालय के तत्कालीन सचिव और दूसरे अधिकारियों ने इन दस्तावेजों को नजरअंदाज किया और आरकेएम पावरगेन को कोयला ब्लॉक हासिल करने में मदद की।
सीबीआई ने इस मामले में 2012 में जांच शुरु की और 2014 में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी और 420 के अलावा भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) और 13(1)(डी) के तहत एफआईआर दर्ज की। इस मामले की जांच के बाद सीबीआई ने 21 सितंबर, 2017 को कोर्ट के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और कहा कि एफआईआर में लगाये गए आरोप बेबुनियाद हैं। कोर्ट सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट से सहमत नहीं थी, इसलिए उसने 27 सितंबर, 2017 को इस मामले की आगे की जांच के आदेश दिए।
इस मामले की आगे की जांच रिपोर्ट 30 अगस्त, 2023 को दाखिल की गई, जिसमें पांचों आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए। इस मामले की ट्रायल के बाद कोर्ट ने इन सभी को बरी करने का आदेश दिया।