उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में भारी वाहनों की चपेट में आकर 150 से अधिक ग्रामीणों की मौत हो चुकी है, जो गंभीर चिंता का विषय है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने दिन के समय भारी वाहनों पर नो-इंट्री लगाने की मांग के समर्थन में शांतिपूर्ण धरना आयोजित किया था।
सुशील बारला ने आरोप लगाया कि षड्यंत्र के तहत पुलिस बल का दुरुपयोग कर शांतिपूर्ण ढंग से बैठे आदिवासियों पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांग पूरी तरह जायज है, क्योंकि यह उनके जीवन की सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि कोल्हान क्षेत्र से गठबंधन सरकार को सर्वाधिक जनप्रतिनिधि मिलने के बावजूद यहां की जनता पर इस तरह का पुलिसिया दमन कोल्हान के माथे पर काला धब्बा है। उन्होंने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाए, वह कम है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।