कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रुप में विभाग प्रचार प्रमुख कुलदीप ने कहा कि यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि हम एक साथ विजयदशमी, संघ स्थापना दिवस और संघ के शताब्दी वर्ष का उत्सव मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघ की यात्रा व्यक्ति निर्माण से शुरू होकर समाज संगठन और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त आंदोलन बन चुकी है।
कुलदीप ने शक्ति पूजन और शस्त्र पूजन की परंपरा को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि शक्ति और शस्त्र दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। शस्त्र पूजन समर्पण और आत्मबल का प्रतीक है, जबकि शक्ति स्वयं संपूर्ण ब्रह्मांड की आधारशिला है।
उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ विषयों सामाजिक समरसता, स्व का भाव, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य—पर विस्तार से चर्चा करते हुए स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि इन विचारों को अपने जीवन में आत्मसात कर राष्ट्र को परम वैभव की ओर अग्रसर करने में योगदान दें।
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी कृष्ण कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा संघ के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी अजय सूद व अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद थे।