उन्हाेंने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा शव संरक्षण के लिए उपलब्ध फ्रीजर पर्याप्त नहीं था। उन्होंने कहा कि एसपी ने कहा कि शव यहीं रखा जाएगा। हमने सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक शव को संरक्षित रखने की मांग की। कोर्ट ने भी आदेश दिए कि शव सुरक्षित रखा जाए और पुनः पोस्टमार्टम कराया जाए, हमें न्याय और पारदर्शिता चाहिए। उन्होंने बताया कि शव को लेकर कई दिनों तक प्रशासन के साथ समन्वय करने में कठिनाइयां आईं। कलेक्टर कार्यालय में बार-बार मुलाकात का प्रयास करने के बावजूद आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। हमने एंबुलेंस का इंतजाम किया और कोर्ट के आदेश तक शव को सुरक्षित रखने की मांग की।
शांति प्रिया ने दावा किया कि उनके पति को 10 से 20 सितंबर के बीच पकड़कर यातनाएं दी गईं और 20 सितंबर को हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि उनके शरीर पर चोट और जख्म हैं, लेकिन गोली का कोई निशान नहीं है, 22 सितंबर को इसे मुठभेड़ के रूप में दिखाया गया, यह पूरी तरह फर्जी मुठभेड़ है। शांति प्रिया ने बताया कि उनके पति पहले से ही नक्सली गतिविधियों में शामिल थे और उन्हें 2008 से कई बार जेल में रखा गया। उन्होंने कहा कि मेरे पति के लिए मुझे 11 साल जेल में बिताने पड़े। अब उनकी मौत के बाद हम सुप्रीम कोर्ट का सहारा ले रहे हैं।