जगदलपुर, 28 सितंबर । छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि बस्तर दशहरा का पर्व मां दंतेश्चरी के प्रति आस्था का सबसे महत्वपूर्ण लाेकपर्व है। इस दाैरान बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव के द्वारा मां देतेश्वरी के छत्र के साथ रथारूढ़ होने के लिए प्रयासरत हैं, यदि शासन-प्रशासन मां दंतेश्चरी के प्रति आस्था के इस लाेकपर्व के साथ काेई भी खिलवाड़ करती है और बस्तर की अराध्य मां दंतेश्वरी के स्थान पर बस्तर राज परिवार के सदस्य काे महिमामंडित करने का प्रयास करती है, ताे यह बस्तर की जनता के आस्था के साथ खिलवाड़ हाेगा, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्हाेंने कहा कि इस संबध में बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक तथ्य काे समझना आवश्यक है, जिसके तहत 25 मार्च 1966 को बस्तर के अंतिम बस्तर महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव की हत्या के बाद तत्कालीन बस्तर कलेक्टरों ने राज परिवार के किसी भी सदस्य को बस्तर दशहरा में मां देतेश्वरी के छत्र के साथ रथारूढ़ होने पर रोक लगाकर उसके स्थान पर मां दंतेश्वरी के मुख्य पुजारी को मां दंतेश्वरी के छात्र को लेकर रथारूढ़ होने का आदेश प्रदान किया गया, जो अनवरत लगभग 57 वर्षों से यह परंपरा जारी है।
उमाशंकर शुक्ला ने कहा वहीं जिन लोगों के द्वारा बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव को बस्तर दशहरा के रथ में मां दंतेश्वरी के छत्र के साथ बैठने की मांग की जा रही है, उनका वजूद सिर्फ बस्तर दशहरा के परंपराओं के निर्वहन तक सीमित है। अर्थात बस्तर दशहरा के परंपराओं में शामिल मांझी, मुखिया, मेंबर, मेंबरिन परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं, जिसे राज परिवार के सदस्याें द्वारा आगे कर बस्तर के लाेक आस्था के साथ खिलवाड़ नही करना चाहिए। विदित हाे कि बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार की परंपरा के निर्वाहन मैं शामिल माझी, मुखिया, मेंबर, मेंबरिन तत्कालीन बस्तर रियासत के अंग थे, जिनके द्वारा आज भी बस्तर दशहरा के परंपरओं के निर्वहन तक मात्र सीमित है। मांझी, मुखिया, मेंबर, मेंबरिन के स्थान पर वर्तमान प्रजातांत्रिक व्यवस्था में पंच, सरपंच जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक, सांसद बस्तर का प्रतिनिधित्व करते हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय काे यह स्पष्ट करना चाहिए कि बस्तर मेें प्रजातांत्रिक मूल्याें काे दरकिनार कर लाेक आस्था के इस बस्तर दशहरा महापर्व की आड़ में बस्तर में राजतंत्र स्थापित करना चाहते हैं।
उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि उन्हाेंने कहा कि क्या प्रजातांत्रिक देश के छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री और बस्तर का प्रशासन किसी राज परिवार के सदस्य को बस्तर रियासत का महाराजा घोषित करने का अधिकार भारत के संविधान में प्राप्त है?
उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि बस्तर के अंतिम महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव के द्वारा लिखित लाेहड़ीगुड़ा तरंगिणी का अध्यन करने पर यह स्पष्ट हाे जायेगा कि वर्तमान राज परिवार के सदस्य काे बस्तर दशहरा में मां दंतेश्वरी के छत्र के साथ् रथारूढ़ होने के लिए तत्कालीन शासन-प्रशासन के द्वारा क्याे राेक लगा दी गई थी। उन्हाेने कहा कि राज परिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव के दादा विजयचंद्र भंजदेव काे बस्तर की जनता ने दशहरा के रथ में चढ़ने तक नहीं दिया था । इसी कड़ी में वर्तमान राज परिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव अब बस्तर दशहरा में मां दंतेश्वरी के छत्र के साथ् रथारूढ़ होने के लिए वर्ष 2000 से अनवरत प्रयासरत हैं। वर्ष 2000 में तत्कालीन बस्तर कलेक्टर प्रवीर कृष्ण ने बस्तर दशहरा पर्व को लोकोत्सव की संज्ञा देकर सामंतशाही को इससे दूर रखकर राजपरिवार सदस्यों को केवल साधारण नागरिक की हैसियत से बस्तर दशहरा में सम्मिलित होने का आदेश दिया था। फलस्वरूप राजपरिवार को एक साधारण नागरिक जैसे इसमें भाग लेना पड़ा। इसी कड़ी में पुन: राजपरिवार सदस्यों के द्वारा 10 अगस्त 2025 को बैठक आहूत कर बस्तर सांसद महेश कश्यप पदेन अध्यक्ष बस्तर दशहरा महापर्व समिति को प्रेषित ज्ञापन में बस्तर दशहरा महापर्व में राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव एवं उनकी पत्नी के नाम का उल्लेख नही करते हुए अपने आप काे स्वयंभू वर्तमान महाराजा-महारानी घाेषित कर पुन: रथारूढ़ करने व ऐतिहासिक मुरिया दरबार में महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किए जाने की मांग रखकर बस्तर की जनता के आस्था के साथ खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं।