सूफी संगीत की श्रृंखला आगे बढ़ी और एक से बढ़कर एक गीत गूंजते रहे। उन्होंने “लाली मेरे लाल की”, “पिया घर आया”, “दमादम मस्त कलंदर”, “सांसो की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम”, “आज रंग है”, “आ जा वे माहीं, अखियां उड़ेक दियां” और “जुगनी” जैसे लोकप्रिय नग़मों से श्रोताओं को संगीत की महफिल का रमणीय अनुभव कराया। हर गीत के बाद दर्शकों की तालियों से सभागार गूंज उठा और माहौल में उत्साह भर गया।
ममता जोशी की मधुर आवाज़ और संगत कलाकारों की लयकारी ने प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बना दिया। हारमोनियम पर भुवन शर्मा, तबले पर अविरभाव वर्मा, ढोलक पर रोशन लाल, की-बोर्ड पर लोकेश राय, ऑक्टोपैड पर गुरमीत सिंह और कोरस में जसवंत सिंह, करण सिंह एवं हितेश शर्मा ने साथ दिया। इस संगीतमय संध्या में बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे और सूफी संगीत के अनोखे अनुभव का आनंद लिया।