शारदीय नवरात्र 22 सितम्बर से, सुबह 6:09 बजे से 8:06 बजे तक करें घट स्थापना : पं.सुरेंद्र शर्मा

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पं सुरेंद्र कुमार शर्मा ने आगे नवरात्र में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार नवरात्र का आरंभ रविवार या सोमवार से होता है तो उस दिन माता का आगमन गज यानी हाथी पर होता है। भागवत महापुराण के अनुसार, जब भी माता का आगमन हाथी पर होता है तो यह बेहद ही शुभ माता जाता है। माता के हाथी पर आगमन का अर्थ है कि कृषि में वृद्धि होती, साथ ही देश में धन समृद्धि में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इस बार नवरात्र में तृतीया तिथि दो दिन लग रही है। इसलिए 24 और 25 सितंबर दोनों ही दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाएगी। 1 अक्टूबर को श्री दुर्गा नवमी के साथ नवरात्र पूर्ण होंगे।

शारदीय नवरात्र पर ग्रहों का बहुत ही शुभ संयोग

शारदीय नवरात्र पर ग्रहों का बहुत ही शुभ संयोग बना हुआ है। नवरात्र पर इस बार बुधादित्य राजयोग, भद्र राजयोग, धन योग (चंद्र मंगल युति तुला राशि में), त्रिग्रह योग (चंद्रमा बुध और सूर्य की युति कन्या राशि में) और गजेसरी राजयोग का शुभ संयोग रहने वाला है। नवरात्रि का आरंभ गजकेसरी राजयोग से हो रहा है क्योंकि, गुरु और चंद्रमा एक दूसरे से केंद्र भाव में होंगे। गुरु मिथुन राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेंगे जिससे गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा। साथ ही इस बार मां दुर्गा भी गज पर सवाल होकर आ रही हैं तो यह बेहद ही दुर्लभ संयोग हैं।