तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार की ओर से झारखंड निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार द्वितीय संशोधन नियमावली को स्वीकृति देना जनता के साथ विश्वासघात है। यदि इसे अध्यादेश के रूप में लागू किया गया तो यह सरकार के लिए आत्मघाती साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून से करोड़ों आदिवासी, दलित, पिछड़े, अगड़े वर्गों और अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब बच्चे-बच्चियों को गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में मिल रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने की कार्रवाई करती है, तो झारखंड गैर सरकारी स्कूल संचालक संघ इस दमनकारी कदम का हर स्तर पर कड़ा विरोध करेगा। उन्होंने चेताया कि जनता इस जनविरोधी निर्णय को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और आने वाले समय में इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।