कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि सामूहिक बुद्धिमत्ता और सहयोगात्मक निर्णय ही सार्थक परिणाम दिला सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल चुनौतियों को चिन्हित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान भी आवश्यक हैं, जिससे नीतिगत निर्णयों का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
कुलगुरु ने बताया कि एनसीआरएफ की प्रक्रिया केंद्रीय स्तर पर पहले ही पूरी की जा चुकी है और अब इसे विश्वविद्यालय में गति देने की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय एनईपी-2030 के सफल क्रियान्वयन में अग्रणी संस्थान के रूप में उभरेगा। साथ ही, उन्होंने राजभवन द्वारा विश्वविद्यालय से की गई अपेक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान उन पर खरा उतरेगा।
उन्होंने अधिष्ठाताओं से आग्रह किया कि वे सक्रिय सहयोग देकर कार्यशाला के समापन तक एक ठोस कार्य-योजना का प्रारूप तैयार करें। उन्होंने यह भी कहा कि पाठ्यक्रम निर्माण और विस्तृत दस्तावेज़ीकरण बाद में किया जा सकता है, लेकिन तत्काल आवश्यकता एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की है।
कार्यशाला में एनईपी संयोजक प्रो. आशीष भटनागर ने प्रेज़ेंटेशन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. सुचेता प्रकाश, प्रो. अनिल दाधीच, प्रो. सुभाष चन्द्र, प्रो. मोनिका भटनागर, प्रो. ऋतु माथुर, प्रो. सुब्रतो दत्ता, प्रो. शिव प्रसाद और प्रो. प्रेरणा जैन उपस्थित रहे।