महोत्सव के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत एवं विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भाग लिया। पूरे कार्यक्रम स्थल पर झूले, लोकगीतों की गूंज और उल्लासपूर्ण वातावरण ने पर्व की छटा को और भी रंगीन बना दिया।
संस्थापिका सुषमा सिंह ने तीज पर्व के सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “ऐसे आयोजन समाज में एकता, सहयोग और परंपराओं के संरक्षण की भावना को और प्रबल बनाते हैं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में समाज की अनेक महिलाओं और युवतियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।