प्रयागराज, 22 अगस्त । इलाहाबाद प्रदेश के मुख्य सचिव से अनचाहे गर्भ के समापन की अनुमति देने में देरी के बजाय त्वरित कार्रवाई की गाइडलाइंस के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उनसे सुझाव मांगा है कि गर्भ गिराने पर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर अनुमति देने हो रही देरी कैसे कम हो।
कोर्ट ने कहा कि यह समझ से परे है कि दो मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पक्ष में होने के बावजूद अधीनस्थ अदालत ने गर्भ गिराने की अनुमति अर्जी निरस्त कर दी। जबकि अनचाहा गर्भ हर दिन कीमती है, तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। लटकाए रखना पीड़िता के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है। कोर्ट ने कहा अधीनस्थ अदालत ने संवेदनहीनता का परिचय दिया और कानून समझने में गलती की।
कोर्ट ने बागपत की दुराचार पीड़िता के अनचाहे गर्भ की समाप्ति की अनुमति के लिए सीएमओ मेरठ को विशेषज्ञ चार डाक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित करने तथा हर पहलू पर विस्तृत जांच कर 24 घंटे में मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ के प्राचार्य को इस जांच में पूरा सहयोग देने तथा जिलाधिकारी मेरठ को पीड़िता के परिवार के मेरठ आने व ठहरने का खर्च उठाने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।
कोर्ट ने पीड़िता याची को ही सीएमओ के साथ मेडिकल बोर्ड के समक्ष जांच के लिए उपस्थित होने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एम के गुप्ता तथा न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने पीड़िता की तरफ से मां द्वारा दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए दिया। जिसमें एडीजे-विशेष जज पाक्सो एक्ट बागपत द्वारा अनचाहा गर्भ गिराने की अनुमति देने से इंकार करने को चुनौती दी गई है।
मालूम हो कि, बागपत के सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता याची की मां ने घटना की एफआईआर दर्ज कराई है। 17 साल की पीड़िता ने अनचाहा गर्भ गिराने की अनुमति के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की।सी एम ओ रिपोर्ट में गर्भ बीस सप्ताह से कम बताया गया और कहा गया कि डाक्टर के द्वारा एम टी पी एक्ट के तहत गर्भ समापन हो सकता है। अदालत ने मेडिकल बोर्ड से दुबारा जांच रिपोर्ट मांगी। वह भी पक्ष में रही। इसके बावजूद अर्जी निरस्त कर दी।