नई व्यवस्था के तहत अब दो तरह के नियम लागू होंगे। जहां-जहां स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन का काम चल रहा है या पूरा हो चुका है, वहां नए कनेक्शन और खराब मीटर केवल स्मार्ट मीटर से ही बदले जाएंगे। लेकिन बाकी क्षेत्रों में फिलहाल पारंपरिक (नॉन-स्मार्ट) मीटर का ही उपयोग किया जाएगा। डिस्कॉम्स की चेयरमैन आरती डोगरा ने बताया कि एडवांस मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइड के पास स्मार्ट मीटर की कमी और सीमित कर्मचारियों के कारण नया कनेक्शन और खराब मीटर बदलने का काम प्रभावित हो रहा था। इस समस्या को देखते हुए संशोधन लागू किया गया है। यह व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक स्मार्ट मीटर रोलआउट पूरी तरह से सुचारु नहीं हो जाता।
गाइडलाइन के अनुसार, उपभोक्ताओं को समय पर सेवाएं देना अनिवार्य होगा। शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे के भीतर मीटर बदला जाना जरूरी है। यदि किसी कारणवश दो महीने तक मीटर उपलब्ध नहीं हो पाता, तो उपभोक्ताओं को बिजली बिल पर 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी और इस राशि की वसूली संबंधित अधिकारी से की जाएगी।