कुलपति प्रो.शर्मा ने अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालय की विकास यात्रा को आगे बढ़ाया है। दो साल में उनकी प्रमुख उपलब्धियों में विश्वविद्यालय परिसर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने संस्कृत महाविद्यालयों को भी नवीन दिशा देने का कार्य किया है। शास्त्री और आचार्य की परीक्षाओं को समय पर कराकर पिछड़े सत्र को नियमित किया है।
उन्होंने वाराणसी के उद्योगपतियों को जोड़कर विकास समिति का गठन किया है, जिससे विश्वविद्यालय के विकास में नई दिशा मिली है। अध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए नवीन दरिया, उत्कृष्ट टेबल, कुर्सी, बड़ा आरो प्लांट, वॉटर कूलर, आधुनिक डस्टबिन और कंप्यूटर लैब जैसी कई आधुनिक सुविधाएं प्रदान की हैं। इसके अलावा उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में पुराने और जर्जर सड़क को नवीन निर्माण कराने का कार्य किया है।
सीवर पाइप लाइन और विद्युत तारों का नवीनीकरण,शताब्दी भवन अतिथि गृह का नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के साथ आधुनिक अतिथि भवन का निर्माण शुरू कराया है। उन्होंने विद्यार्थियों को रोजगारपरक बनाने के लिए कई पाठ्यक्रम संचालित किए हैं, जिनमें ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण और मंदिर प्रबंधन जैसे कौशल पाठ्यक्रम शामिल हैं। अभिनंदन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार, वित्त अधिकारी हरिशंकर मिश्र, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. महेन्द्र पांडेय, प्रो. अमित कुमार शुक्ल आदि की भी मौजूदगी रही।