पिछले एक दशक में भारत ने जिस गति से आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी विकास की यात्रा तय की है, उसने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वैश्विक मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट जैसे कारकों के बीच भी भारत की वृद्धि दर स्थिर और मजबूत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नवीनतम अनुमानों में भारत 2025 में 6.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने वाला देश बताया गया है, जो किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था के लिए इस समय सबसे अधिक है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया कि भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सबसे सुदृढ़ उभरते बाज़ारों में से एक है। OECD ने भारत को “विश्व विकास का इंजन” कहा है, वहीं संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) के अनुसार भारत अब प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के शीर्ष पांच गंतव्यों में शामिल है और नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं व मैन्युफैक्चरिंग में निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है।
S&P ग्लोबल का भरोसा
इन वैश्विक आकलनों को मजबूत आधार देता है रेटिंग एजेंसी S&P Global का नवीनतम विश्लेषण, जिसमें कहा गया है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा। एजेंसी के मुताबिक अगले तीन वर्षों में भारत की जीडीपी औसतन 6.8 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ेगी और 2025 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह दर वैश्विक मंदी के बीच उभरते बाज़ारों के अन्य देशों की तुलना में कहीं बेहतर है। S&P का आकलन है कि भारत राजकोषीय घाटे को कम करने पर जोर दे रहा है और यह सरकार की स्थायी व संतुलित वित्तीय नीतियों के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एजेंसी के मुताबिक पिछले 56 वर्षों में सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और बजट में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) का हिस्सा लगातार बढ़ा है। केंद्रीय सरकार का पूंजीगत व्यय 2026 तक 11.2 ट्रिलियन रुपये (जीडीपी का 3.1 प्रतिशत) पहुंचने का अनुमान है, जबकि एक दशक पहले यह 2 प्रतिशत था। राज्यों के पूंजीगत खर्च को मिलाकर कुल सार्वजनिक निवेश जीडीपी के लगभग 5.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो साफ़ करता है कि बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में सुधार भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति का केंद्र है।
महंगाई पर नियंत्रण, स्थिर मौद्रिक नीति
S&P Global का मानना है कि बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी में सुधार लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि में आ रही रुकावटों को दूर करेगा। मौद्रिक नीति में महंगाई लक्ष्य आधारित सुधार के परिणाम भी सकारात्मक रहे हैं। एक दशक पहले, 2008 से 2014 के बीच, भारत में महंगाई कई बार दो अंकों में पहुंची थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों में, वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति संकट के बावजूद खुदरा महंगाई (CPI) औसतन 5.5 प्रतिशत रही है। हाल के महीनों में महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2-6 प्रतिशत के लक्ष्य दायरे के निचले स्तर पर बनी हुई है। स्थिर मौद्रिक माहौल, मजबूत घरेलू पूंजी बाजार और निवेशकों का विश्वास आने वाले वर्षों में भारत की विकास गति को सहारा देंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति की तस्वीर
आर्थिक आंकड़े यह भी बताते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में देश में प्रतिदिन औसतन 38 किलोमीटर नई सड़क का निर्माण हुआ है। रेलवे के विद्युतीकरण की रफ्तार 2014 की तुलना में तीन गुना हो चुकी है, हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं, और मेट्रो रेल नेटवर्क अब 20 से अधिक शहरों में सक्रिय है। बंदरगाहों की क्षमता में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है, जिससे माल ढुलाई की दक्षता और निर्यात क्षमता दोनों में वृद्धि हुई है।
उद्योग और स्टार्टअप की नई पहचान
औद्योगिक क्षेत्र में “मेक इन इंडिया” और “प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)” योजनाओं ने विनिर्माण को मजबूती दी है। UNCTAD की रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का भारत में निवेश तेजी से बढ़ा है। देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जहां 2024 तक 110 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियां बन चुकी हैं। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि भारत केवल उपभोक्ता बाजार नहीं रहा, बल्कि नवाचार और तकनीकी समाधान का एक वैश्विक केंद्र बन रहा है।
डिजिटल भारत की ताक़त
डिजिटल मोर्चे पर भारत की उपलब्धियां वैश्विक मानकों को नया आकार दे रही हैं। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अभूतपूर्व रिकॉर्ड बनाया है—2024 में यह 100 अरब से अधिक ट्रांज़ैक्शनों तक पहुंचा। भारत का 5G नेटवर्क दुनिया के सबसे तेज़ी से लागू होने वाले नेटवर्क में से एक है और अब 6G अनुसंधान पर भी निवेश शुरू हो चुका है। ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और छोटे कारोबारों के लिए नए अवसर खोले हैं।
सामाजिक मोर्चे पर बदलाव
सामाजिक विकास में भी भारत की तस्वीर बदल रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा प्रणाली को अधिक कौशल-आधारित और आधुनिक बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत करोड़ों परिवारों को मुफ़्त स्वास्थ्य बीमा मिला है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट 2024 में भारत ने लगातार तीसरे वर्ष अपने सूचकांक में सुधार किया है। स्वच्छ जल, बिजली और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच अब लगभग हर घर तक पहुंच चुकी है।
वैश्विक मंच पर बढ़ती भूमिका, चुनौतियां भी कम नहीं
भूराजनीतिक स्तर पर भी भारत की भूमिका उल्लेखनीय है। 2023 में G20 की अध्यक्षता ने भारत को वैश्विक नेतृत्व के केंद्र में ला खड़ा किया। वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाने, जलवायु परिवर्तन पर ठोस पहल सुझाने और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को विश्व में प्रस्तुत करने में भारत की भूमिका को व्यापक सराहना मिली है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्रीय सुरक्षा तक, भारत की संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति ने उसे सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता दी है। हालांकि, विकास की इस तेज़ यात्रा के बीच चुनौतियां भी मौजूद हैं; आर्थिक असमानता, शहरी-ग्रामीण विकास का अंतर, जलवायु परिवर्तन का असर और कौशल विकास की ज़रूरतें। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत को अपनी श्रमशक्ति को नई अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करने की गति बढ़ानी होगी। साथ ही, कार्बन उत्सर्जन में कमी और नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी को और तेज़ी से बढ़ाने की आवश्यकता है।
विकसित भारत की ओर हम सभी के बढ़ते कदम
इसके बावजूद, नीतिगत स्थिरता, निवेश-अनुकूल माहौल, मजबूत घरेलू बाजार और तकनीकी नवाचार की क्षमता को देखते हुए यह अनुमान गलत नहीं होगा कि भारत अगले दो दशकों में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में निर्णायक स्थान हासिल करेगा। 2047 तक “विकसित भारत” का लक्ष्य अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक विस्तृत राष्ट्रीय संकल्प और रणनीतिक रोडमैप है, जिसमें आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय और तकनीकी सभी मोर्चों पर समन्वित प्रगति का खाका तैयार है। भारत की यह यात्रा केवल “उभरते बाजार” की नहीं, बल्कि “वैश्विक नेतृत्व” की ओर बढ़ते राष्ट्र की कहानी है। IMF, विश्व बैंक, OECD, UNCTAD और S&P Global जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के आंकड़े इस तथ्य को पुख्ता करते हैं कि भारत आज वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सबसे तेज़ और स्थायी वृद्धि करने वाला देश है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज़ अब केवल सुनी ही नहीं जाती, बल्कि उसका अनुसरण भी किया जाता है। इसे हम सभी को एक सुनहरे अवसर के रूप में जरूर लेना चाहिए।