कनाडा ने खालिस्तान नाम से दूतावास नहीं, एक सांपों का अड्डा खोला हैः आर पी सिंह

Share

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ ग़लत निर्णय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय संधियों का विशेष रूप से विएना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशन्स का सीधा और गंभीर उल्लंघन है, जो केवल संप्रभु देशों के मिशनों को मान्यता देता है, किसी काल्पनिक अलगाववादी राज्य को नहीं।

आरपी सिंह ने हिलेरी क्लिंटन की चेतावनी को याद दिलाते हुए कहा कि अगर आप अपने आंगन में सांप पालेंगे तो वो आपके पड़ोसियों के साथ एक दिन आपको भी डंस लेंगे। जिन चरमपंथी ताक़तों को “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के नाम पर पनाह दी जा रही है, वही ताक़तें अतीत में आतंकवाद का महिमामंडन कर चुकी हैं, भारतीय राजनयिकों की हत्या कर चुकी हैं और आज भी भारत के खिलाफ़ हिंसा को भड़का रही हैं। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि एक लोकतंत्र के खिलाफ राज्य प्रायोजित राजद्रोह है।

आर पी सिंह ने कहा कि इस चिंताजनक घटनाक्रम को देखते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को तत्काल और सशक्त राजनयिक विरोध दर्ज कराना चाहिए। यह सिर्फ़ कनाडा का आंतरिक मामला नहीं है। यह भारत की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मानदंडों पर सीधा हमला है।

उन्होंने कहा कि भारत को कनाडा से तथाकथित खालिस्तान “एम्बेसी” पर तत्काल सफाई मांगनी चाहिए। इसके साथ ही ऐसे किसी भी अलगाववादी संगठन को मिली फंडिंग या मान्यता को तुरंत समाप्त किया जाए। भारत ने हमेशा राजनयिक परिपक्वता दिखाई है, लेकिन अब ऐसे देशों के लिए “शून्य सहिष्णुता” की नीति अपनानी होगी जो अलगाववादी एजेंडों को ऑक्सीजन दे रहे है।

उन्होंने कहा कि कनाडा को खुद से पूछना चाहिए कि वो लोकतंत्र को पोषित कर रहे हैं या आतंकवाद को जन्म दे रहे हैं? भारत चुप बैठकर अपनी संप्रभुता का अपमान और उल्लंघन नहीं सहेगा।