सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से ओपी सोलंकी और हरेंद्र नील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने भर्ती को रद्द करने की गुहार करते हुए याचिका दायर की है। याचिका में यह प्रार्थना नहीं है कि भर्ती को लेकर राज्य सरकार कोई निर्णय ले। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से भर्ती रद्द नहीं करने का निर्णय लेने के आधार पर ही याचिका सारहीन नहीं हो जाती है। याचिकाकर्ता की ओर से बहस पूरी करने के बाद अदालती समय पूरा होने पर अदालत ने मामले की सुनवाई 5 अगस्त को तय की है।