मां दुर्गा स्व-सहायता समूह की महिलाएं बांस व ताड़ के पत्तों से बना रही देशी राखियां

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स्व-सहायता समूह में काम करने वाली महिलाओं में नक्सल प्रभावित ग्राम पंचायत ईतामपारा की रहने वाले मंगलदई ने बताया कि कुछ सालों पहले उसके जेठ स्व. चैतू राम यादव (बड़े भाई) को नक्सलियों पुलिस का मुखबिर बताते हुए हत्या उसके सामने ही कर दी थी। इस हादसे को लेकर वह कई दिनों तक सदमें थी । जेठ की हत्या के बाद उसके परिवार के अन्य सदस्यों को नक्सली नहीं मार दे, इसलिए उसके परिवार के लोग ईतामपरा को छोड़कर भैरमगढ़ में एक शिविर में जीवन यापन कर रहे हैं । मंगलदई ने बताया कि यहां पर उसने कई महिलाओं को राखी बनाते देखा और वह इस काम से जुट गई । उसने बताया वह इस समय दुर्गा नाम से संचालित महिला स्व-सहायत समूह से जुड़ी है, और पिछले कई सालों से वह राखियों का निर्माण में लगी है, भाइयों के लिए वे देशी राखियां बना रही हैं।

विकास खंड परियोजना प्रबंधक रोहित सोरी ने बताया कि वे पिछले तीन साल से प्रति वर्ष 50-60 हजार रुपये की राखियां बेच रही है। इस साल डिमांड अधिक आने से बिक्री ज्यादा होने की संभावना है। राखी की खरीद अधिकारी कर्मचारी भी करेंगे।

भैरमगढ़ जनपद सीईओ मुकेश कुमार देवांगन ने बताया कि इस रक्षा बंधन भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र पूरी तरह से प्राकृतिक होगा । बांस और ताड़ के पत्तों से बनी राखियां उन्हें बांधी जाएंगी। इसके लिए मां दुर्गा स्व सहायता समूह ने बड़ी मात्रा में राखियां बना ली हैं। खास बात यह है, कि जिला प्रशासन इसके लिए बाजार उपलब्ध करवायेगा।