स्कूल की दीवारें जगह-जगह से दरक चुकी हैं, छतों से प्लास्टर झड़ रहा है और कई कमरे इतने खतरनाक हो चुके हैं कि उन्हें बंद करना पड़ा है। शिक्षक और छात्र दोनों हर दिन डर के साए में स्कूल आ रहे हैं। बच्चों ने बताया कि एक महीने पहले लंच टाइम में एक कक्षा की छत से प्लास्टर गिरा, सौभाग्यवश उस वक्त कमरे में कोई नहीं था। अगर बच्चे मौजूद होते, तो गंभीर हादसा हो सकता था।
स्थिति को और भी भयावह बनाता है स्कूल भवन के ऊपर से गुजरती हाई टेंशन बिजली की तारें। विशेषज्ञों के अनुसार यह कभी भी जानलेवा साबित हो सकती हैं। ऐसे में अगर कोई बड़ा हादसा हुआ, तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ प्रशासन और संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
स्कूल के विज्ञान अध्यापक सतीश कुमार ने बुधवार को बताया कि इमारत की स्थिति को देखते हुए अब छात्रों को दो शिफ्टों में पढ़ाया जा रहा है, ताकि एक समय में अधिक संख्या में छात्र न रहें। कई बार विभागीय अधिकारियों को पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
हरियाणा एकता अभिभावक मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा कि यह लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ है। ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन ने भी चेतावनी दी है कि अगर कोई हादसा हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की होगी। उन्होंने मांग की है कि स्कूल को तुरंत दूसरी सुरक्षित इमारत में शिफ्ट किया जाए और मौजूदा भवन को गिराकर नया निर्माण कराया जाए।