एआईडीएसओ के अनुसार, पिछले शैक्षणिक सत्र 2024-25 में जनभागीदारी शुल्क के रूप में 300 रुपये लिए जाते थे, लेकिन चालू सत्र 2025-26 में इसे बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। इस 200 रुपये की वृद्धि का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
संगठन ने इस मुद्दे को पहले भी जनभागीदारी समिति की अध्यक्ष मीना साहू, सचिव डॉ. प्रदीप कुमार शुक्ला (प्राचार्य) और स्थानीय विधायक इंद्रकुमार साहू के समक्ष उठाया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
एआईडीएसओ के प्रभारी प्रीतम साहू ने कहा कि “आजादी के 78 साल बाद भी शिक्षा आम छात्रों के लिए सुलभ नहीं हो पाई है। आज शिक्षा केवल धनवानों के लिए सीमित होती जा रही है। उन्होंने मांग की कि 200 रुपये की अतिरिक्त शुल्क वृद्धि का फैसला तुरंत वापस लिया जाए और जिन छात्रों से यह राशि वसूली गई है, उन्हें वापस की जाए।
छात्र संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एआईडीएसओ ने मांग की है कि जनभागीदारी समिति या किसी भी अन्य माध्यम से शुल्क वृद्धि पर तत्काल रोक लगाई जाए।