सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को तीसरे दिन भी सुनवाई जारी रहेगी। इस मुद्दे पर पहली सुनवाई 21 मई को हुई, जिसमें केंद्र के प्रतिनिधि सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकारी जमीन पर किसी का भी अधिकार नहीं हो सकता, चाहे वह ‘वक्फ बाय यूजर’ के आधार पर ही क्यों न हो। मेहता ने कहा कि सरकारी संपत्ति पर सरकार का पूर्ण अधिकार है, और यदि वह वक्फ के रूप में पहचान ली गई हो, तो भी उसे वापस लिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी प्रभावित पक्ष अदालत में नहीं आया है, न ही किसी ने संसद के अधिकार को चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में वक्फ (संशोधन) कानून के खिलाफ पांच याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है, इनमें AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की याचिका भी शामिल है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि इस कानून के पारित होने के पीछे कोई अव्यवस्थित प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह एक सुविचारित निर्णय था जिसमें छह महीने की गहन नागरिक चर्चा और 96 बैठकें शामिल थीं।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा कि यदि उन्हें अंतरिम राहत चाहिए, तो अपने तर्कों को और मजबूत बनाएं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि यदि कोई संपत्ति भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है, तो उसे वक्फ संपत्ति नहीं माना जा सकता। सॉलिसिटर जनरल ने इस पर तीन मुख्य मुद्दों की बात की, जबकि कपिल सिब्बल ने कहा कि यह मुद्दे इससे कहीं अधिक व्यापक हैं।
21 मई को सुनवाई के एक अन्य चरण में, सॉलिसिटर जनरल ने यह बताया कि वक्फ कानून में दिए गए अधिकारों को संविधान के अनुसार वापस लिया जा सकता है। उन्होंने यह साफ किया कि वक्फ एक इस्लामी अवधारणा है, लेकिन यह इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि याचिकाओं में कोई प्रमाणित प्रभावित पक्ष नहीं है, जिससे यह साबित होता है कि यह मामला औचित्य के बिना उठाया गया है।
केंद्र ने 5 अप्रैल को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वक्फ (संशोधन) बिल को कानून बना दिया था। यह कानून संसद में भारी समर्थन के साथ पारित किया गया, जिसमें कुछ प्रमुख राजनीतिक नेता जैसे असदुद्दीन ओवैसी और मोहम्मद जावेद ने इसके खिलाफ याचिकाएं दायर की हैं। इस कानून को लेकर कई सभी प्रमुख और नागरिक अधिकार संगठनों ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
सरकार ने इस नए कानून के लाभों को उजागर करते हुए बताया कि 2013 के बाद से वक्फ संपत्तियों में 20 लाख एकड़ से अधिक का इजाफा हुआ है, जिसके कारण कई विवाद उत्पन्न हुए हैं। ऐसे में, यह महत्वपूर्ण है कि इस कानून की निष्पक्षता और असलियत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का महत्व बढ़ता जा रहा है। इस प्रकार, वक्फ कानून पर विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई इस समय चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।