पंजाब सरकार ने हाल ही में ड्राइविंग लाइसेंस घोटाले से जुड़े विजिलेंस ब्यूरो के दो वरिष्ठ अधिकारियों को बहाल किया है। ये अधिकारी, जिनमें फ्लाइंग स्क्वॉड के एIG स्वर्णदीप सिंह और जालंधर के SSP हरप्रीत सिंह शामिल हैं, को 25 अप्रैल को निलंबित किया गया था। दोनों को उनके पूर्व पदों पर ही बहाल किया गया है। इस बीच, विजिलेंस के मुख्य अधिकारी एसपीएस परमार का निलंबन केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा मंजूर कर लिया गया है। यह सब घटनाक्रम उस समय हुआ है जब इस मामले पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जिसके चलते शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए पंजाब सरकार की नीति पर घेराबंदी की है। उन्होंने लिखा, “AAP सरकार का यह बदलाव एक और बड़ा झूठ है।” मजीठिया ने आरोप लगाया है कि यह अधिकारी पहले भ्रष्ट थे लेकिन अब सरकार द्वारा उन्हें बहाल किया गया है, जिसका अर्थ यह है कि अब वे ईमानदार बन गए हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को एसपीएस परमार को भी बहाल करना चाहिए, क्योंकि यह सब एक ही मामले से जुड़ा हुआ है और दोनों फैसले एक-दूसरे के विरोधाभासी प्रतीत होते हैं।
वहीं, कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी पंजाब सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का दावा किया था, तो अब उनके द्वारा बहाल किए जा रहे अधिकारियों का निर्णय संदिग्ध है। उन्होंने यह मांग की कि ऐसे अधिकारियों को जिनके खिलाफ पहले कार्रवाई की गई थी, को फिर से बहाल करना सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। बाजवा ने कहा, “यह शासन नहीं, बल्कि धमकी है कि जब हमने आपको निलंबित किया था तो क्या आप अब नियमों का पालन कर रहे हैं?”
पंजाब में ड्राइविंग लाइसेंस घोटाले का मामला तब प्रकाश में आया जब 7 अप्रैल को रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) के कार्यालयों और ड्राइविंग टेस्ट केंद्रों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई के दौरान 24 व्यक्तियों को रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और 16 FIR दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार, ये व्यक्तियों ने ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी प्रक्रियाओं में तेजी लाने के एवज में अवैध रूप से पैसे वसूल किए थे।
इस मामले में कई परिवहन अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें से एक रमनदीप सिंह ढिल्लों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य दो अधिकारी फरार हैं। हालाँकि, इन अधिकारियों के खिलाफ कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे राजनीति और प्रशासन के बीच भ्रामक स्थिति उत्पन्न हुई है। विजिलेंस प्रमुख एसपीएस परमार के खिलाफ कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई, जिससे सरकार की छवि को नुकसान पहुँचा है। इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि पंजाब में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीतियों में न केवल भ्रम है, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेजी से बढ़ रहा है।