पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोमवार को एक गंभीर बयान दिया, जिसमें उन्होंने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह नियंत्रण रेखा (LoC) पर कभी भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया कि यदि भारत कोई आक्रामक कदम उठाता है, तो पाकिस्तान की ओर से उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्षेत्र में राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए स्थिति को परमाणु युद्ध के कगार पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा, आसिफ ने आरोप लगाया कि भारत खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, और उन्होंने 2016-17 में संयुक्त राष्ट्र को दिए गए सबूतों का भी संदर्भ दिया।
पाकिस्तान की सेना ने हाल के दिनों में लगातार 12वें दिन भारत की ओर सीजफायर का उल्लंघन किया, जिसमें 5-6 मई की रात को कुपवाड़ा, बारामुल्ला, पुंछ, राजौरी, मेंढर, नौशेरा, सुंदरबनी और अखनूर में फायरिंग की गई। भारतीय सेना ने इस उत्पीड़न का तगड़ा जवाब दिया। इस बीच, भारतीय सरकार ने तैयारी को और मजबूत करते हुए 7 मई को पूरे देश के 244 जिलों में मॉक ड्रिल करने का फैसला लिया है। यह मॉक ड्रिल नागरिकों को हमलों के दौरान खुद को सुरक्षित रखने की प्रशिक्षण प्रदान करेगी, जिसमें हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन भी बजाए जाएंगे।
गृह सचिव ने इस संबंध में राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ एक बैठक की योजना बनाई है। मॉक ड्रिल का उद्देश्य नागरिकों को आपातकालीन स्थितियों में तैयार करना है, और यह पिछले 54 वर्षों में पहली बार किया जा रहा है। इससे पहले, इस तरह की मॉक ड्रिल भारत में 1971 में हुई थी, जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया था। हालांकि, हाल के घटनाक्रम में रविवार और सोमवार की रात पंजाब के फिरोजपुर छावनी में ब्लैकआउट प्रैक्टिस की गई, जहां रात 9 बजे से 9:30 बजे तक बिजली काट दी गई थी।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के संबंध में यह स्थिति बेहद नाजुक है। पहलगाम हमले के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है, जिससे युद्ध की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। ऐसे में, नागरिक सुरक्षा की इस मॉक ड्रिल की आवश्यकता और प्रासंगिकता और भी अधिक हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के अभ्यास न केवल नागरिकों को संभावित खतरनाक परिस्थितियों के प्रति जागरूक करते हैं, बल्कि यह सुरक्षा बलों के लिए भी एक मूल्यवान अनुभव प्रदान करते हैं। भारतीय सरकार की इस पहल से यह संकेत मिलता है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और किसी भी स्थिति के लिए तैयार है।