राजस्थान में राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के तहत, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बागीदौरा से विधायक जयकृष्ण पटेल को 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह घटना 4 मई को हुई, और यह राजस्थान के इतिहास में पहली बार है जब किसी विधायक को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है। जयकृष्ण पटेल भारत आदिवासी पार्टी (BAP) से हैं और उन पर आरोप है कि उन्होंने विधानसभा में खनन विभाग से जुड़े सवालों को वापस लेने के लिए 10 करोड़ रुपये की मांग की थी। यह मामला जैसे-जैसे बढ़ा, ACB ने सूचना पर तेजी से कार्रवाई की और पूरे ऑपरेशन को बहुत गोपनीय रखा।
ACB के डीजी, रवि प्रकाश मेहरड़ा ने बताया कि इस विवादास्पद कार्रवाई के लिए कई चुनौतियाँ थीं। विधायक की सक्रियता ने समिति के सदस्यों को सतर्क कर दिया था, और पहले से ही कानून का पालन करने के लिए सावधानी बरती गई थी। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को सूचित किया और कार्रवाई की अनुमति प्राप्त की। इसके बाद मैंने इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम को दिशा-निर्देश दिए और इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव न होने की बात भी स्पष्ट की।
जब ACB की टीम व्यवहार में आई, तो विधायक ने पूरी तरह से सर्तकता बरती। शिकायतकर्ता पर नजर रखते हुए उसने उससे सवाल पूछे, और यह अनुमान लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया उसके सम्मान के खिलाफ हो सकती है। शिकायत के सत्यापन के बाद, ACB ने शक्ति से आगे बढ़ते हुए विधायक के खिलाफ सबूत इकट्ठा करना शुरू किया। एक महीने तक ऑपरेशन की पूरी जानकारी को गुप्त रखा गया। अधिकारी ने कहा कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक था कि विधायक के खिलाफ सबूत सही तरीके से प्राप्त किए जाएं।
मामले में एक रोचक पहलू यह है कि विधायक ने 20 लाख रुपये की राशि को किसी अन्य व्यक्ति को सौंपने का प्रयास किया था, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वह इस पूरे खेल में शामिल था। एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, विधायक को रंगे हाथों पकड़ा गया और यहां तक कि रिश्वत के पैसों के सभी साक्ष्य उनके खिलाफ हैं। हालांकि विधायक ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि उसने कोई पैसे नहीं लिए।
इस कार्रवाई के साथ, राजस्थान की जनता को यह संदेश गया है कि देश में कानून सभी के लिए समान है और किसी भी जनप्रतिनिधि का भ्रष्टाचार सामने आने पर उसे दंडित किया जाएगा। हालांकि, अभी भी सवाल बना हुआ है कि क्या यह कार्रवाई राजनीति के दायरे में आएगी या नहीं। एसीबी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई और विधायक इसी तरह की गतिविधियों में लिप्त हैं, तो वह उन पर भी कार्रवाई करने के लिए तैयार है। इस प्रकार की घटनाओं के पीछे का मुद्दा यह है कि किस तरह से जनप्रतिनिधि अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदार होते हैं और जनता के प्रति उनकी नैतिकता क्या होती है।