उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिला। सहारनपुर, मथुरा, गाजियाबाद और आगरा सहित कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश हुई। मथुरा में हुई बारिश इतनी अधिक थी कि सड़कों पर पानी भर गया और यह स्थिति हुई कि जल निकासी के लिए लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ी। घरों, दुकानों और निजी अस्पतालों में पानी की गहराई दो फीट तक पहुंच गई, जिससे वहां की जीवनशैली प्रभावित हुई। अड़ींग कस्बे में लोग बाल्टियों की मदद से पानी निकालते हुए देखे गए।
इसी प्रकार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों जैसे मेरठ और बुलंदशहर में भी बादल छाए हुए हैं। इन शहरों में हवाओं की गति 20 से 25 किलोमीटर प्रतिघंटा के बीच रही। मौसम विभाग ने आज राज्य के 61 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, साथ ही बिजली गिरने की चेतावनी भी दी गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह परिस्थितियाँ अगले पांच दिनों तक बनी रह सकती हैं। पिछले दिन यानी गुरुवार को जालौन का उरई सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, बावजूद इसके कि यह कल के मुकाबले दो डिग्री की गिरावट है। वहीं, 40.2 डिग्री पर बांदा दूसरे स्थान पर रहा।
हालांकि, इस बारिश की एक दुखद झलक भी सामने आई है। पिछले 24 घंटे में बिजली गिरने से गोरखपुर और बस्ती में दो व्यक्तियों की जान चली गई है। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि मौसम में बदलाव की वजह से न केवल प्राकृतिक सौंदर्य में वृद्धि हुई है, बल्कि इससे जनजीवन पर भी असर पड़ा है।
मौसम के इस अचानक बदलाव के पीछे का कारण बताते हुए लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने जानकारी दी। उनका कहना है कि इस समय दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर एक शुष्क रेखा स्थित है, जो कि केरल तक फैली हुई है। इस स्थिति का प्रभाव पूरे उत्तर प्रदेश पर महसूस किया जा रहा है। इसके अलावा, एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है, जिससे बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमीयुक्त हवाएं और दक्षिण-पश्चिमी हवाएं टकरा रही हैं। इसी कारण से मौसम में यह विविधता आई है।
राज्य भर के मौसम से जुड़े सभी नवीनतम अपडेट्स के लिए संबंधित सामाजिक माध्यमों और रिपोर्ट्स से जुड़े रहने की सलाह दी जाती है। ऐसे मौसमी बदलावों का अध्ययन तथा समय पर सूचनाएं प्राप्त करना सभी के लिए महत्वपूर्ण है।