50+ शरबत वैरायटी, 11 में चांदी वर्क: पुष्कर के गुलाब से 130 साल पुरानी कहानी!

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राजस्थान की शरबत संस्कृति में, अजमेर का भिक्कीलाल नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। 130 साल पहले शुरू हुई इस यात्रा की शुरुआत दो भाइयों—भिक्कीलाल और छोटेलाल—ने की थी, जिन्होंने सोडा बेचना आरंभ किया था। जल्द ही, उन्होंने पुष्कर के प्रसिद्ध गुलाब के फूलों से एक अनूठा शरबत बनाने का विचार किया, जिससे लोग दीवाने हो गए। आज, यह शरबत राजस्थान का एक प्रमुख ब्रांड बन चुका है, जिसमें 50 से अधिक विविधताएँ उपलब्ध हैं। इन सब में 11 शरबत वैरायटी में चांदी का उपयोग होता है, जो इसे और भी खास बनाता है।

भिक्कीलाल मित्तल ने बताया कि उनके पूर्वजों ने 1895 में शरबत बनाने की शुरुआत की थी, जब राजशाही का दौर था। उस समय, शरबत केवल राजपरिवारों और धनी व्यापारियों के लिए ही उपलब्ध था। पुष्कर में उगने वाले गुलाब की सुवासित किसमत के कारण, उन्होंने गुलाब का शरबत बनाया, और धीरे-धीरे कई अन्य स्वादों में भी विस्तार किया। शुरुआत एक छोटी चाय की दुकान से हुई थी, लेकिन आज यह एक विशाल शोरूम में बदल चुका है, जहाँ से हरियाली और स्वाद के शरबत बेचे जाते हैं।

मित्तल ने जानकारी दी कि वर्तमान में उनके पास 50 से अधिक वैरायटी के शरबत उपलब्ध हैं, जिनमें गुलाब, खस, ठंडाई, केसर, और आम पन्ना जैसे फ्लेवर शामिल हैं। अब शरबत बनाने में चांदी का उपयोग करने की परंपरा भी विकसित हो चुकी है, जो न केवल इसके स्वाद में बृद्धि करती है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक मानी जाती है। शरबत की शुद्धता और सुंदरता दोनों का ध्यान रखा जाता है, जिसमें रचनात्मकता का भी समावेश है।

भिक्कीलाल के शरबत को बनाने की प्रक्रिया भी पारंपरिक और व्यवस्थित है। गुलाब की पत्तियों को हाथ से तोड़कर, उन्हें साफ किया जाता है, और फिर उनका अर्क निकाला जाता है। अर्क के साथ मिश्री की चाशनी मिलाकर, रंग और स्वाद को बढ़ाने के लिए फूड कलर का प्रयोग किया जाता है। इन सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए, शरबत को तैयार किया जाता है। फलों के शरबतों का निर्माण भी एक अलग विधि से होता है, जिसमें फ्रूट्स का ताजा जूस इस्तेमाल किया जाता है।

आज, भिक्कीलाल शरबती एक विस्तृत ग्राहक वर्ग में लोकप्रिय है। इसके 100 से अधिक वितरक देश-विदेश में कार्यरत हैं, जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक शरबत पहुँचाते हैं। सालाना टर्नओवर लगभग 3 करोड़ रुपये का है। वर्तमान में, मित्तल परिवार की पांचवीं पीढ़ी इस परंपरा का निर्वहन कर रही है, जो न केवल गुणवत्ता पर ध्यान देती है, बल्कि नये ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नवीन विचारों पर भी काम कर रही है।

स्थानीय ग्राहक, जैसे अजय मेहरा और हितेश टेकवानी, ने शरबत की पारंपरिक विशेषताओं और स्वाद की तारीफ की। उनके लिए, यह केवल एक पेय नहीं है, बल्कि यादों के साथ जुड़ा हुआ एक अनुभव भी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी साझा किया जाता रहा है। भिक्कीलाल का शरबत केवल गर्मियों में राहत नहीं देता, बल्कि यह एक सांस्कृतिक धरोहर की तरह भी महत्वपूर्ण है। यह राजस्थानी पारंपरिकता का प्रतीक है, जो गुणवत्ता और ग्राहक संतोष को बनाए रखते हुए आगे बढ़ रहा है।