उत्तर प्रदेश में हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने प्रदेश के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की संपत्तियों के विवरण को उजागर किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, यूपी के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह और पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार की संपत्तियों की तुलना में जिले के डीएम और एसपी के पास अधिक संपत्तियां हैं। जानकारी के मुताबिक, दोनों शीर्ष अधिकारी केवल नोएडा में एक मकान के मालिक हैं, जबकि उच्चाधिकारित आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के पास 2 से 3 बंगलों और फ्लैटों का मालिकाना हक है। मिर्जापुर के आईजी राकेश प्रकाश सिंह के पास 25 अचल संपत्तियां हैं, इनमें 9 बगीचे और 5 मकान शामिल हैं।
इस रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि मेडिकल एजुकेशन की निदेशक किंजल सिंह के पास 10 संपत्तियां हैं, जिनमें 3 कृषि भूमि, 4 मकान और 3 प्लॉट भी शामिल हैं। सस्पेंडेड आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश के पास बिहार के सीवान में 8.85 एकड़ कृषि भूमि है, जबकि अन्य विवरण उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी केंद्रीय कर्मचारियों एवं प्रशिक्षण मंत्रालय (DOPT) को दी गई जानकारी में सामने आई है। यूपी कैडर के अधिकारियों ने रिपोर्ट में साफ किया है कि वे कितनी संपत्तियों के मालिक हैं और उनकी कीमत क्या है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यूपी के आईएएस-आईपीएस अधिकारियों की पहली पसंद नोएडा है, जहां 60% से अधिक अधिकारी निवास करते हैं। इसके बाद लखनऊ का स्थान आता है, जहां कई अधिकारी संपत्तियों के मालिक हैं। हाल के वर्षों में संपत्तियों की कीमतों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। उदाहरण स्वरूप, लखनऊ के सरोजनी नगर में 2014 बैच के प्रमोटेड आईपीएस अधिकारी केशव चंद्र गोस्वामी की पत्नी ने एक रेजिडेंशियल प्लॉट खरीदा था, जिसकी कीमत 2 साल में तीन गुनी हो गई है।
शुक्र है, उत्तर प्रदेश में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की संपत्तियों ने एक नया रुख दिखाया है। कुछ अधिकारियों की संपत्तियों में दोगुनी नहीं तो तिगुनी वृद्धि हुई है। जैसे कि केशव चंद्र गोस्वामी की पत्नी ने मोहनलालगंज में 5 लाख में खरीदी गई जमीन की कीमत 10 गुना बढ़कर 50 लाख रुपये हो गई है। इसके साथ ही प्रदीप कुमार, जो ईओडब्ल्यू में तैनात हैं, के पास कुल 17 संपत्तियां हैं, जिनमें से 16 पैतृक हैं।
उनके अलावा, गोंडा की पीएसी में कमांडेंट त्रिभुवन सिंह के पास कुल 7 संपत्तियां हैं, जिनमें से 6 उन्होंने हाल के वर्षों में खरीदी हैं, और इनमें अधिकतर एग्रीकल्चर लैंड शामिल है। इस प्रकार, यूपी के अधिकारियों की संपत्तियों की विस्तृत जानकारी से स्पष्ट होता है कि सरकारी सेवा में रहते हुए भी उन्होंने अपनी निजी संपत्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
इस रिपोर्ट ने अधिकारियों की संपत्तियों की ट्रैकिंग को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दिया है, और यह बात सामने आई है कि प्रशासन में शामिल लोग किस प्रकार आर्थिक तंगी के बावजूद संपत्तियों में इजाफा कर रहे हैं। यह विषय न केवल कानूनी बल्कि नैतिकता के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।