IAS-IPS अधिकारीयों के मुकाबले टीना-रिया डाबी की संपत्ति रहस्यमय, खुद घर भी नहीं!

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आईएएस टीना डाबी और उनकी बहन रिया डाबी की संपत्तियों की स्थिति पर हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि उनके पास देश में कोई संपत्ति नहीं है। न तो उनके नाम पर कोई घर है और न ही प्लॉट है। हालांकि, टीना डाबी के पति प्रदीप के गवांडे की पारिवारिक संपत्ति महाराष्ट्र के लातूर में स्थित है। वहीं, आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन की पत्नी के पास बेंगलुरु में 3 एकड़ कृषि जमीन है, जिसकी बाज़ार में कीमत लगभग 8.25 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस प्रकार की जानकारी केंद्र सरकार को आईएएस और आईपीएस अधिकारियों द्वारा दी गई है, जिसमें यह बताया गया है कि कौन अधिकारी किस संपत्ति का मालिक है।

राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारियों की संख्या 332 बताई गई है, जिनमें से 17 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। दैनिक भास्कर ने राजस्थान में उच्च पदस्थ अफसरों की संपत्तियों का ब्योरा पेश किया है। इसमें मुख्य सचिव सुधांश पंत, शिखर अग्रवाल, आलोक गुप्ता, कुंजीलाल मीणा, वैभव गालरिया और अन्य अधिकारियों की संपत्तियों के बारे में जानकारी दी गई है। उदाहरण के लिए, मुख्य सचिव सुधांश पंत के पास गुरुग्राम और जयपुर में कई फ्लैट्स और खेती की जमीन है, जिससे उनकी वार्षिक आय 25 लाख 30 हजार रुपए है।

शिखर अग्रवाल की संपत्तियों का ब्योरा भी दिलचस्प है। उनकी पत्नी के नाम पर जयपुर में स्थित बहुमूल्य प्रॉपर्टीज हैं, जिनसे उनकी सालाना आय 58 लाख रुपए है। इसके अतिरिक्त, आलोक गुप्ता ने अपनी संपत्तियों से हर महीने 23,500 रुपए का किराया देने वाले फ्लैट्स का भी जिक्र किया है। कुंजीलाल मीणा और वैभव गालरिया जैसी अन्य हस्तियों ने भी करोड़ों की संपत्ति की जानकारी दी है, जिसमें कृषि भूमि, फ्लैट्स और आवासीय प्लॉट्स शामिल हैं।

आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की संपत्तियों की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि अधिकांश अधिकारियों के पास काफी संपत्ति है, जबकि टीना डाबी और रिया डाबी इसके अपवाद हैं। किंतु, टीना डाबी के पति प्रदीप के गवांडे की संपत्तियों में लातूर में स्थित पारिवारिक मकान और अन्य संपत्तियां शामिल हैं, जिनकी कुल मूल्य लगभग 1.58 करोड़ रुपए है।

इन समस्त जानकारियों के आलोक में यह सवाल उठता है कि प्रशासनिक अधिकारियों की संपत्तियों का खुलासा कितनी प्रासंगिकता रखता है। कई अधिकारी अपनी संपत्तियों की मौजूदा कीमत नहीं दर्शाते हैं, जबकि कुछ ने केवल खरीद मूल्य का उल्लेख किया है। सच यह है कि यह रिपोर्ट हमें यह समझने में मदद करती है कि प्रशासनिक सेवा में रहने वाले अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान आर्थिक रूप से कैसे प्रबंधित करते हैं और इस प्रक्रिया में उनकी संपत्तियों का मूल्य क्या होता है।