कुणाल कामरा को मिली जान से मारने की धमकियां: 500 से ज्यादा कॉल, पुलिस से 7 दिन की मोहलत मांगी

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर बनाए गए एक पैरोडी गाने के बाद कॉमेडियन कुणाल कामरा को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कामरा को अब तक 500 से अधिक धमकी भरे कॉल मिले हैं, जिनमें लोग उन्हें जान से मारने की बात कर रहे हैं। इस विवाद के बीच, कामरा को मंगलवार को खार पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन उनके वकील ने पुलिस से 7 दिन का समय मांगा है। कामरा इस समय मुंबई से बाहर हैं।

36 वर्षीय स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने हाल ही में अपने एक शो में शिंदे के राजनीतिक करियर पर व्यंग्य किया था। उन्होंने फिल्म ‘दिल तो पागल है’ के एक गाने की पैरोडी बनाई, जिसमें शिंदे को ‘गद्दार’ कहा गया। इस पैरोडी गाने में उन्होंने डिप्टी सीएम के गुवाहाटी जाने और उनके ऑटो रिक्शा चलाने का भी जिक्र किया। इस बीच, कामरा ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर एक और नया पैरोडी गाना “हम होंगे कंगाल एक दिन” पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने तोड़-फोड़ के दृश्यों के साथ-साथ जलती हुई तस्वीरें भी साझा की।

शिवसेना (शिंदे) के कार्यकर्ताओं ने कामरा की इस पैरोडी को अत्यधिक आपत्तिजनक माना और रविवार रात को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के यूनीकॉन्टिनेंटल होटल में तोड़फोड़ की। इस घटना में लगभग 40 शिवसैनिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हास्य व्यंग्य करना गलत नहीं है, लेकिन इसकी एक मर्यादा होती है। उन्होंने कहा कि कामरा ने जो किया, उसे देखकर ऐसा लगता है कि उन्होंने किसी से सुपारी लेकर ऐसा किया है।

गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा में कहा कि कामरा की कॉल रिकॉर्डिंग, CDR और बैंक स्टेटमेंट को भी जांचा जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके पीछे कौन है। यह पूरा मामला मार्च 24 को दर्ज की गई एफआईआर के बाद और भी गंभीर रूप ले लिया है।

इस बीच, कॉमेडियन कुणाल कामरा और ओला के CEO भाविश अग्रवाल के बीच भी एक विवाद बीच में आया था, जहां दोनों के बीच सोशल मीडिया पर लंबी बहस हुई थी। कामरा ने ओला ई-बाइक के सर्विस सेंटर की एक तस्वीर साझा करते हुए उनकी सेवाओं पर सवाल खड़ा किया था।

इस नए विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थितियों को लेकर और भी चर्चाएं शुरू कर दी हैं, और देखने वाली बात होगी कि आगे क्या नया घटनाक्रम सामने आता है। यह मामला न केवल कॉमेडी की सीमाओं को परखता है बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे को भी उजागर करता है।