राजस्थान विधानसभा के स्पीकर वासु देव देवनानी ने हाल ही में सदन की कार्यवाही के दौरान एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है जब विधानसभा में सभी 200 विधायक एक साथ उपस्थित हैं। पिछले कई सत्रों में सदस्यों की संख्या में कमी देखने को मिली है, चाहे वह किसी सदस्य की जेल जाने की वजह से हो या आकस्मिक निधन के कारण। इसके पीछे एक बड़ा कारण विधानसभा भवन में संभवतः मौजूद वास्तु दोष को माना जा रहा है, जिसे दूर करने के लिए वास्तुकारों से सुझाव लेकर परिवर्तन किए गए हैं।
हाल के समय में कई बदलावों के माध्यम से इस वास्तु दोष को ठीक करने की कोशिश की गई है। सबसे पहले, विधायकों के प्रवेश द्वार को बदला गया है। पहले पश्चिमी प्रवेश द्वार (दरवाजा नंबर-6) का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब पूर्वी द्वार (दरवाजा नंबर-7) को मुख्य प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम दिशा में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है, जिससे नकारात्मक प्रभाव सामने आता है। इसके अलावा, सदन के अंदर कारपेट और सीटों का रंग भी बदला गया है। हरे रंग की बजाए हल्का गुलाबी रंग चुना गया है, जिसे वास्तु शास्त्र के अनुसार अधिक लाभदायक माना गया है।
बदला हुआ सीटिंग अरेंजमेंट भी इस दिशा में एक कदम है। वास्तुविदों के अनुसार, बैठक का स्थान सही ढंग से निर्धारित किया जाना चाहिए। इसी तरह से, विधानसभा अध्यक्ष की टेबल पर दो तिरंगे भी लगाए गए हैं, जो सदन की शक्ति को बढ़ाते हैं। इसके पीछे का विचार यह है कि झंडे देश की पहचान के प्रतीक हैं। दर्शक दीर्घा में काले रंग की वस्तुओं को ले जाने पर भी रोक लगाई गई है, क्योंकि इसे अशुभ माना गया है।
वास्तु दोष के अध्ययन में कई पहलू सामने आते हैं। पंडित बंशीलाल शास्त्री ने बताया कि विधानसभा भवन के पास श्मशान का होना और अन्य विशेषताओं ने नकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है। उनका सुझाव है कि वास्तु के अनुसार पूरी विधानसभा भवन का अध्ययन कर इसे 16 जोनों में बांटकर किया जाना चाहिए। इससे न केवल वास्तु दोष दूर होंगे, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ेगी।
स्पीकर वासु देव देवनानी ने कहा कि सदन की स्थिति में सुधार लाने के लिए कई वास्तू विशेषज्ञों से सलाह ली गई है और उनके द्वारा दिए गए सुझावों को लागू करने की कोशिश की जा रही है। इस प्रयास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी 200 विधायक सत्र में नियमित रूप से उपस्थित रहें। वास्तु शास्त्र हिंदू संस्कृति में महत्वपूर्ण है और इसे ऊर्जा प्रवाह को नियंत्रित करने का विज्ञान माना जाता है।
इसी कड़ी में, पिछले कुछ वर्षों में हुए कई बदलावों से यह साफ होता है कि सदन की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए गंभीरता से काम किया जा रहा है। वास्तु शास्त्र की मान्यताओं का पालन करते हुए, यह कोशिश की जा रही है कि इस महत्वपूर्ण संस्थान में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहे। इस दिशा में उठाए गए कदम न केवल विधानसभा के कार्यकाल में स्थिरता लाने में सहायक हैं, बल्कि इसे भविष्य में भी समृद्ध बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।