फिल्म उद्योग में एक नई और रोचक फिल्म “सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव” का भव्य प्रीमियर होने जा रहा है, जिसमें विनीत कुमार सिंह, आदर्श गौरव और शशांक अरोड़ा की तिकड़ी दर्शकों का मन लूटने के लिए तैयार है। यह फिल्म मालेगांव के फिल्म निर्माता नासिर शेख और उनके दोस्तों की जिंदगी पर आधारित है, और इसे बनाने का काम रीमा कागती और जोया अख्तर ने किया है। डायरेक्टर रीमा कागती ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा है कि इन तीनों कलाकारों ने बेहद खूबसूरत तरीके से नासिर और उनके दोस्तों के जीवन को पर्दे पर जीवित किया है। इनकी अदाकारी वास्तविकता को बखूबी दर्शाती है, जो कि दर्शकों के दिलों को छू लेगी।
विनीत को हाल ही में फिल्म “छावा” में उनके बेहतरीन रोल के लिए सराहना मिल रही है। वहीं आदर्श गौरव ने “खो गए हम कहां” और “द वाइट टाइगर” जैसी चर्चित फिल्मों में अपने अभिनय से खास पहचान बनाई है। शशांक अरोड़ा को अमेजन प्राइम के शो “मेड इन हेवेन” में उनके पात्र कबीर के लिए काफी प्रशंसा मिली है। इन तीनों स्टार्स ने फिल्म और अपनी भूमिकाओं के बारे में दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत की है। इस चर्चा में उन्होंने नासिर शेख और उनके दोस्तों के जीवन को जीने के अपने अनुभव के बारे में साझा किया।
इस बातचीत में विनीत ने बताया कि फिल्म में उनके लिए कई डायलॉग्स व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित हैं। उन्होंने साझा किया कि जब वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपने शहर से निकले थे, तो उन्होंने बहुत सारी चुनौतियों का सामना किया। एक विशेष संवाद “अपने को भी चांस मिला होता तो अपुन भी कुछ कर सकते थे” का जिक्र करते हुए कहा कि यह लाइन लाखों लोगों की भावनाओं को व्यक्त करती है, जो अपने सपनों को पूरा करने में संकोच करते हैं। यह फिल्म सभी उन लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है जो अपने सपनों के पीछे भागने का साहस नहीं जुटा पाते हैं।
आदर्श ने नासिर की भूमिका निभाने के लिए उनके साथ अधिक से अधिक समय बिताने का प्रयास किया। उन्होंने नासिर की कहानी को समझने और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को जीने में समय बिताया। उनके दोस्तों और परिवार से मिलकर आदर्श ने नासिर की वास्तविकता को महसूस किया और यही उन्हें किरदार में ढलने में मददगार साबित हुआ। शशांक ने एक महत्वपूर्ण सीन में खुशी और दर्द का संघर्ष दिखाने के विषय में चर्चा करते हुए कहा कि जब अच्छे निर्देशकों और सहकर्मियों का साथ हो तो यह काबिले तारीफ हो जाता है।
फिल्म के हर एक सीन एक अलग अनुभव रखते हैं और सभी कलाकारों ने इसे बहुत ही संवेदनशीलता के साथ किया है। विनीत ने फिल्म के बाहर के अनुभवों को चैलेंजिंग बताया, वहीं आदर्श के लिए शफीक की जिंदगी में आने वाली मुश्किलें सबसे कठिनाई भरी रहीं। शशांक ने भी कई इमोशनल पल को याद किया, जो उन्होंने फिल्म के दौरान जिए। यह फिल्म एक अनूठी कथा को प्रस्तुत करती है, जो न केवल मनोरंजन करती है बल्कि जीवन की वास्तविकताओं से भी लोगों को जोड़ेगी। “सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव” निश्चित रूप से एक सदाबहार फिल्म साबित होगी, जो दर्शकों के दिलों में अपने गहरे प्रभाव छोड़ने वाली है।